UP News Today: लखनऊ में सरकारी स्कूल की बदहाल व्यवस्था और साफ-सफाई की स्थिति को सामने लाने वाले पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राहत दी है। कोर्ट ने पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर अगली सुनवाई तक रोक लगाते हुए उनके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले की परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि स्कूल की कमियां सामने आने के बाद पत्रकार के खिलाफ बदले की भावना से एफआईआर दर्ज की गई। कोर्ट ने कहा कि कमियों को दूर करने के बजाय पूरे मामले को ‘ईगो इश्यू’ बना दिया गया।
‘किलिंग द मैसेंजर’ जैसा बताया मामला

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी सरकारी स्कूल की कमियां सामने लाने वाले पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना ऐसा प्रतीत होता है, जैसे समस्या को ठीक करने के बजाय उसे उजागर करने वाले व्यक्ति को ही निशाना बनाया जा रहा हो। कोर्ट ने इस स्थिति को ‘किलिंग द मैसेंजर’ जैसा बताया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई कानून के अनुरूप उचित नहीं है।
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24 अगस्त को दर्ज हुई थी FIR
यह मामला लखनऊ के गोसाईगंज थाना क्षेत्र का है। पत्रकार अमित यादव ने अपने खिलाफ 24 अगस्त को दर्ज की गई एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
20 अगस्त को स्कूल पहुंचे थे पत्रकार
याचिका में बताया गया कि अमित यादव 20 अगस्त को पत्रकार के तौर पर गोसाईगंज क्षेत्र के बेगरिया मऊ स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय पहुंचे थे। वहां उन्होंने स्कूल की स्थिति का जायजा लिया और कुछ शिक्षकों से बातचीत भी की। इसके बाद स्कूल की बदहाली और साफ-सफाई से जुड़ी स्थिति को सामने लाया गया।
हाईकोर्ट से पत्रकार को मिली राहत
मामले की परिस्थितियों और याचिका में रखे गए तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने पत्रकार को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने एफआईआर पर रोक लगाते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक इस मामले में पत्रकार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए।
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मामले ने उठाए अहम सवाल
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद यह मामला सरकारी संस्थानों की कमियों को उजागर करने वाली पत्रकारिता और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई को लेकर चर्चा में आ गया है। कोर्ट की टिप्पणी का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि यदि किसी सरकारी स्कूल में वास्तविक कमियां हैं, तो प्राथमिकता उन्हें दूर करने की होनी चाहिए, न कि उन्हें सामने लाने वाले व्यक्ति को निशाना बनाने की।

Sunny Singh उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध और स्थानीय समाचारों को कवर करने वाले पत्रकार हैं। उन्हें डिजिटल पत्रकारिता और समाचार लेखन का लगभग 4 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने India Update 24 और Hind 24 में कार्य किया है। वर्तमान में वे UP News 24 की डिजिटल डेस्क पर कार्यरत हैं।












