Bijnor News Today: बिजनौर जल्द ही CNG उत्पादन के बड़े केंद्र के रूप में उभरने वाला है। जिले में 550 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से कई CBG/CNG प्लांट लगाए जा रहे हैं। इनमें करीब 138 करोड़ रुपये का निवेश पहले ही जमीन पर उतर चुका है। खास बात यह है कि इन प्लांटों में गन्ने की प्रेसमड (मैली), सुपर नेपियर घास और पशुओं के गोबर जैसे स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
रोजाना 60 टन तक उत्पादन की उम्मीद
स्थानीय कच्चे माल से बड़े स्तर पर गैस उत्पादन की तैयारी है। अनुमान के मुताबिक, जिले में विभिन्न परियोजनाएं पूरी होने के बाद प्रतिदिन करीब 60 टन CNG का उत्पादन संभव हो सकता है। इससे बिजनौर की जरूरत पूरी होने के साथ आसपास के दूसरे जिले को भी गैस की आपूर्ति की जा सकेगी।
पेट्रोल-डीजल का विकल्प तैयार करने पर जोर
ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ रहा देश। पश्चिम एशिया में संकट के बाद पेट्रोलियम पदार्थों पर देश की निर्भरता कम करने की कोशिशें तेज हुई हैं। इसी दिशा में चीनी मिलों में गन्ने की प्रेसमड और अनाज से एथनॉल तैयार किया जा रहा है। अब बायोमास और जैविक कचरे से CNG/CBG उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
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पश्चिमी यूपी में बिजनौर की खास भूमिका
गन्ने की भरपूर उपलब्धता बना रही है जिले को खास। एक सर्वे के अनुसार देश में CNG के संभावित उत्पादन का करीब 24 प्रतिशत हिस्सा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तैयार किया जा सकता है। इसमें बिजनौर की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिले में 10 चीनी मिलें होने के कारण गन्ने की प्रेसमड के रूप में कच्चा माल आसानी से उपलब्ध हो सकता है।
बुंदकी में तेजी से तैयार हो रहा प्लांट
100 करोड़ की परियोजना से शुरू होगी पहली बड़ी पहल। युवा बायो एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की ओर से बुंदकी चीनी मिल के पास करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से CNG उत्पादन प्लांट तैयार किया जा रहा है। इस प्लांट की प्रस्तावित क्षमता प्रतिदिन 10 टन CNG उत्पादन की है। प्रेसमड की आपूर्ति के लिए बुंदकी और बहादरपुर चीनी मिलों के साथ एमओयू भी किया गया है। यहां 31 अक्टूबर से उत्पादन शुरू करने की तैयारी बताई गई है।
नेपियर घास से भी बनेगी गैस
खेतों में उगने वाली सुपर नेपियर अब ऊर्जा का स्रोत बनेगी। CNG/CBG उत्पादन में सुपर नेपियर ग्रास को महत्वपूर्ण कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। उत्तराखंड की एक प्रमुख कंपनी नजीबाबाद में प्रतिदिन 10 टन क्षमता वाला CBG प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है। इसमें नेपियर घास के साथ जरूरत के अनुसार चीनी मिलों की प्रेसमड और पशुओं के गोबर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
गैस बनने के बाद भी बचेगा फायदा
प्लांट से निकलने वाला अवशेष भी किसानों के काम आएगा। CNG बनाने की प्रक्रिया के बाद बचने वाले पदार्थ को जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे एक तरफ प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, वहीं किसानों को जैविक खाद उपलब्ध कराने में भी मदद मिल सकती है।
ऐसे बनती है CNG और PNG
मैली से मीथेन और फिर तैयार होती है उपयोगी गैस। CNG बनाने के लिए चीनी मिल की प्रेसमड जैसे जैविक पदार्थ को पचाया जाता है, जिससे मीथेन गैस बनती है। इस मीथेन को शुद्ध करने के बाद अधिक दबाव पर कंप्रेस किया जाता है, जिससे CNG तैयार होती है और इसका इस्तेमाल वाहनों में किया जाता है। कम दबाव पर कंप्रेस करके इसे रसोई गैस के रूप में इस्तेमाल करने योग्य बनाया जा सकता है। शुरुआती चरण में इन परियोजनाओं का फोकस CNG उत्पादन पर रहेगा।
कई चीनी मिलें भी लगा सकती हैं CBG प्लांट
जिले की कई मिलें ऊर्जा उत्पादन की तैयारी में जुटी हैं। स्योहारा और बिलाई चीनी मिल ने CBG प्लांट लगाने का प्रस्ताव भेजा है। चांगीपुर चीनी मिल भी जल्द प्लांट लगाने की तैयारी में है। चांदपुर मिल में भी CBG प्लांट प्रस्तावित है। धामपुर चीनी मिल ने रिलायंस इंडस्ट्रीज, जबकि अफजलगढ़ और बुंदकी ने युवा बायो एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के साथ एमओयू किया है।
गोबर से भी CNG बनाने की तैयारी

डेयरी और पशुपालन से निकलने वाला गोबर बनेगा कमाई का जरिया। बिजनौर मिल अपनी सहइकाई धनौरा में प्रेसमड भेजेगी। वहीं मथुरा की एक कंपनी जिले में करीब एक हजार गायों की डेयरी स्थापित कर गोबर से CNG बनाने वाला प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है। इससे पशुपालन और बायो-एनर्जी को एक साथ बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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कौन सी कंपनी कितना निवेश करेगी?
बिजनौर में अलग-अलग परियोजनाओं का बड़ा निवेश प्रस्तावित है।
| कंपनी | क्षमता (टन प्रतिदिन) | निवेश |
|---|---|---|
| रिएनर्जी डायनेमिक्स प्राइवेट लिमिटेड | 25 | 250 करोड़ रुपये |
| यूपी ग्रीन वेंचर्स | 6 | 25 करोड़ रुपये |
| युवा बायो एनर्जी | 10 | 100 करोड़ रुपये |
| आगमिक ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड | 8 | 40 करोड़ रुपये |
नोट: क्षमता टन प्रतिदिन और निवेश करोड़ रुपये में है।
किसानों के लिए भी खुलेंगे नए रास्ते
कच्चे माल की मांग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है। CNG/CBG प्लांटों के लिए प्रेसमड, नेपियर घास और गोबर की जरूरत होगी। इससे किसानों और पशुपालकों के लिए स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त आय के अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही जैविक खाद के रूप में प्लांट से निकलने वाले अवशेष का उपयोग भी किया जा सकेगा।
डीएम ने बताया जिले का बड़ा लक्ष्य
बिजनौर को गैस उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है। जिलाधिकारी जसजीत कौर के अनुसार, जिले में जल्द इतनी CNG तैयार करने का लक्ष्य है कि बाहर से गैस मंगाने की जरूरत न पड़े। इसके उलट दूसरे जिलों को भी बिजनौर से CNG भेजी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि कई बड़ी कंपनियां जिले में CBG प्लांट लगाने जा रही हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने के साथ किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

Tannu Chauhan एक अनुभवी डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार लेखन का लगभग 3 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने Royal Bulletin और Moradabad Live News में डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में वह UP News 24 के लिए विभिन्न विषयों पर तथ्यात्मक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित समाचार एवं डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं।












