डिंपल यादव पूरे देश की मां हैं… सपा विधायक ने ऐसा क्यों कहा? अखिलेश यादव पर भी दिया बड़ा बयान

Mohammad Faheem Dimple Yadav Statement: सपा विधायक मोहम्मद फहीम ने डिंपल यादव को ‘पूरे देश की मां’ बताते हुए उन्हें ममता का प्रतीक बताया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि 2027 में अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे।


August 18, 2026 by

Dimple Yadav Whole Country Mother: यूपी के मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक मोहम्मद फहीम का एक बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कांवड़ियों के स्वागत के दौरान उन्होंने सपा सांसद डिंपल यादव को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। विधायक ने डिंपल यादव को ‘पूरे देश की मां’ बताते हुए उन्हें ममता का प्रतीक बताया।

कांवड़ियों के बीच पहुंचे सपा विधायक

दरअसल, मोहम्मद फहीम हरिद्वार से बरेली की ओर कांवड़ लेकर जा रहे शिवभक्तों का स्वागत करने पहुंचे थे। इसी दौरान एक कांवड़िये की कांवड़ पर समाजवादी पार्टी से जुड़े प्रमुख नेताओं की तस्वीरें लगी हुई थीं। कांवड़ के एक तरफ सपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तस्वीर थी, जबकि दूसरी तरफ उनकी पत्नी और सपा सांसद डिंपल यादव की तस्वीर दिखाई दे रही थी।

कैमरे के सामने डिंपल यादव की तारीफ

Mohammad Faheem Dimple Yadav Statement

मौके पर मौजूद कैमरों के सामने विधायक मोहम्मद फहीम ने कांवड़ पर लगी तस्वीरों की ओर इशारा करते हुए डिंपल यादव का जिक्र किया। उन्होंने उन्हें ‘इस वक्त पूरे देश की मां’ और ‘ममता का प्रतीक’ बताया। विधायक के इस बयान के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

मुलायम सिंह यादव का भी किया जिक्र

Mulayam Singh Yadav

विधायक ने कांवड़ पर समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की तस्वीर होने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्तों की आस्था और उनके आशीर्वाद से समाजवादी पार्टी को आने वाले समय में मजबूती मिलेगी।

2027 में अखिलेश यादव के CM बनने का दावा

2027 में अखिलेश यादव के CM बनने का दावा

मोहम्मद फहीम ने इसी दौरान उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों की दुआओं और आशीर्वाद से 2027 में अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

ये भी पढ़ें: लाल किला झूठ बोलने की जगह नहीं… अखिलेश यादव का बयान, PM Modi पर साधा निशाना!

2027 से पहले सियासी समीकरण पर नजर

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां लगातार तेज हो रही हैं। समाजवादी पार्टी भी अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने के साथ-साथ उन सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जो चुनावी नतीजों पर प्रभाव डाल सकते हैं।

लोधी समाज पर सपा की नजर

इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी की नजर ओबीसी वर्ग के महत्वपूर्ण सामाजिक समूह लोधी समाज पर भी बताई जा रही है। बीजेपी के साथ लंबे समय से जुड़े इस समाज को अपने पक्ष में लाने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से कई राजनीतिक संकेत दिए जा रहे हैं। इसी रणनीति के तहत वीरांगना अवंती बाई लोधी से जुड़े कार्यक्रमों और उनकी विरासत को लेकर भी सपा सक्रिय दिखाई दे रही है।

अवंती बाई लोधी के जरिए बड़ा संदेश

अखिलेश यादव ने वीरांगना अवंती बाई लोधी की जयंती के मौके पर छुट्टी और उनकी भव्य प्रतिमा लगाने जैसे कदमों की बात कही है। इसे लोधी समाज के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी की रणनीति का उद्देश्य उन सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाना है, जिनका प्रभाव अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है।

बीजेपी के मजबूत वोट बैंक में सेंध की कोशिश

लोधी समाज को उत्तर प्रदेश में बीजेपी के मजबूत सामाजिक आधार का हिस्सा माना जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के दौर से ही इस समाज का बीजेपी के साथ मजबूत राजनीतिक जुड़ाव रहा है। ऐसे में अगर सपा इस वर्ग के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने में सफल होती है, तो आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश के कई क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

ये भी पढ़ें: क्या आजम खान के दांव से अखिलेश साध पाएंगे मुस्लिम वोटबैंक? समझिए सपा का पूरा प्लान

चार से पांच फीसदी आबादी, लेकिन असर बड़ा

राजनीतिक चर्चाओं में लोधी समाज की आबादी उत्तर प्रदेश में करीब चार से पांच फीसदी के आसपास बताई जाती है। संख्या के लिहाज से यह प्रदेश का सबसे बड़ा सामाजिक समूह नहीं है, लेकिन कई विधानसभा सीटों पर इसकी मौजूदगी चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यही वजह है कि 2027 के चुनाव से पहले अलग-अलग राजनीतिक दल इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

सपा की रणनीति कितनी होगी कामयाब?

एक तरफ सपा विधायक का डिंपल यादव को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है, तो दूसरी तरफ पार्टी की नजर अपने पारंपरिक आधार से बाहर जाकर नए सामाजिक समीकरण तैयार करने पर है।

अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा यदि ओबीसी के अलग-अलग समूहों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने में सफल होती है, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका राजनीतिक लाभ मिल सकता है। हालांकि, इन प्रयासों का वास्तविक असर चुनावी मैदान में कितना दिखाई देगा, यह आने वाले समय में साफ होगा।

Share: