कासगंज में बाढ़ बनी आफत: 25 दिन से गांवों में अंधेरा, घरों में घुस रहे सांप-बिच्छू; ग्रामीणों में दहशत

Kasganj News: कासगंज में गंगा के बढ़ते जलस्तर से आठ से अधिक गांवों में बाढ़ के हालात गंभीर हैं। कई गांवों में 25 दिनों से बिजली गुल है, घरों तक पानी पहुंच रहा है और सांप-बिच्छू निकलने से ग्रामीण दहशत में रात गुजार रहे हैं।


August 21, 2026 by

Kasganj News Today: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पटियाली क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का पानी लंबे समय से जमा है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को दिन में जलभराव और रात में अंधेरे के बीच गुजर-बसर करनी पड़ रही है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 25 दिनों से कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बंद है, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

घरों तक पहुंच रहा पानी

बाढ़ का पानी गांवों के आसपास ही नहीं, बल्कि कई स्थानों पर घरों के दरवाजों तक पहुंच गया है। पानी में सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीव तैरते दिखाई देने से ग्रामीणों में डर का माहौल है। रात के समय बिजली न होने के कारण इनसे बचाव करना और भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण परिवार बच्चों और बुजुर्गों को लेकर बेहद सतर्क हैं।

अंधेरे में गुजर रही रात

अंधेरे में गुजर रही रात

बिजली कटौती ने बाढ़ की परेशानी को और गंभीर बना दिया है। रात होते ही प्रभावित गांवों में अंधेरा छा जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के पानी में जहरीले जीवों की मौजूदगी के बीच बिना रोशनी के रहना बेहद जोखिम भरा है। इसी डर के कारण कई परिवार रातभर जागकर घर और आसपास के हालात पर नजर रखने को मजबूर हैं।

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मोबाइल चार्ज कराने को मजबूर

बिजली न होने का असर संचार व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों को मोबाइल फोन चार्ज कराने के लिए कई किलोमीटर दूर दूसरे गांवों या बाजारों तक जाना पड़ रहा है। मूंझखेड़ा निवासी रुकुम सिंह के मुताबिक सनौड़ी बाजार में 20 रुपये देकर मोबाइल चार्ज कराना पड़ता है और इसके लिए करीब पांच किलोमीटर का सफर करना पड़ता है। आपदा के समय मोबाइल ही संपर्क का सबसे बड़ा साधन है, ऐसे में उसकी बैटरी खत्म होना ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त चिंता बन गया है।

कई गांव लंबे समय से प्रभावित

कई गांव लंबे समय से प्रभावित

पटियाली क्षेत्र के मूंझखेड़ा, नगला दुर्जन, नगला दिपी, नगला जयकिशन, नगला खना, हंसी नगला, राजेपुर कुर्रा, नगला चतुरी, नगला जैली और नगला नरपत समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। कुछ घरों में पानी प्रवेश कर चुका है, जबकि आसपास के रास्तों और खेतों में भी जलभराव बना हुआ है। शहवाजपुर और मुजफ्फरनगर क्षेत्र में खेतों में पानी भरा होने से खेती पर भी इसका गंभीर असर पड़ा है।

फसलें हुईं बर्बाद

लगातार जलभराव से किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में लंबे समय से पानी खड़ा रहने के कारण फसलें खराब हो चुकी हैं। ग्रामीणों के सामने अब सिर्फ आवागमन और बिजली की समस्या नहीं है, बल्कि रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। बारिश होने पर स्थिति और खराब हो जाती है, क्योंकि जलभराव के बीच सुरक्षित स्थान तलाशना मुश्किल हो जाता है।

बच्चों की पढ़ाई पर असर

बाढ़ और जलभराव के कारण प्रभावित गांवों के बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। रास्तों पर पानी होने और आवागमन में परेशानी के चलते बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। लंबे समय तक यही स्थिति बनी रही तो उनकी पढ़ाई का नुकसान बढ़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ ने परिवारों की दिनचर्या पूरी तरह बदल दी है।

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सुरक्षा के लिए बिजली बंद

विद्युत विभाग के अधिकारियों के अनुसार बाढ़ प्रभावित गांवों में सुरक्षा के लिहाज से बिजली आपूर्ति बंद की गई है। विद्युत उपखंड अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि विद्युत पोल के आसपास पानी भरा होने के कारण करंट फैलने और हादसा होने की आशंका रहती है। इसी वजह से कई स्थानों पर आपूर्ति रोक दी गई है। जिन क्षेत्रों में पानी कम या सूख चुका है, वहां स्थिति देखकर बिजली बहाल की जा रही है।

गंगा का जलस्तर बढ़ा

गंगा के जलस्तर में पिछले 24 घंटे के दौरान सात सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, बैराजों से पानी का प्रवाह फिलहाल स्थिर बताया गया है। नरौरा बैराज से बृहस्पतिवार को प्रवाह बढ़ा था, जिसका असर रात तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दिखाई दिया। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।

अधिकारियों ने किया निरीक्षण

अधिकारियों ने किया निरीक्षण

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता जितेंद्र कुमार अग्रवाल ने बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील इलाकों का दौरा किया। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों के साथ स्थिति का जायजा लिया और त्वरित बचाव व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही बाढ़ सुरक्षा और कटानरोधी कार्यों से संबंधित प्रस्ताव तैयार करने के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।

कांवड़ियों की बढ़ेगी परेशानी

गंगा का जलस्तर बढ़ने से गंगाघाटों पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं और कांवड़ भरने पहुंचने वाले कांवड़ियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। शनिवार और रविवार को बड़ी संख्या में कांवड़ियों के घाटों पर पहुंचने की संभावना है। बढ़े हुए जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। गंगाघाटों पर गोताखोरों के साथ पीएसी की फ्लड यूनिट भी तैनात की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल बचाव किया जा सके।

बैराजों पर पानी का प्रवाह

वर्तमान स्थिति के अनुसार हरिद्वार बैराज से 96,731 क्यूसेक, बिजनौर बैराज से 1,18,978 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 1,34,584 क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया। कछला ब्रिज पर जलस्तर 162.47 मीटर के निशान पर बताया गया है। गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव को देखते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है।

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ग्रामीणों ने बताई परेशानी

ग्रामीणों ने बताई परेशानी

नगला जैली निवासी नन्हे ने बताया कि गांव के लोग पिछले 25 दिनों से बाढ़ की समस्या झेल रहे हैं। घरों तक पानी पहुंचने की स्थिति बनी हुई है और बिजली नहीं होने से परेशानी और बढ़ गई है। उनका कहना है कि मोबाइल चार्ज कराने के लिए भी करीब पांच किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। ऐसे हालात में ग्रामीणों के लिए जरूरी सेवाओं तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

प्रशासन की बढ़ी जिम्मेदारी

बाढ़ प्रभावित गांवों में लगातार बने जलभराव और बिजली संकट के बीच ग्रामीणों को राहत मिलने का इंतजार है। गंगा के जलस्तर पर प्रशासन और सिंचाई विभाग नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों की प्राथमिकता संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत देने और पानी कम होने के बाद बिजली आपूर्ति को सुरक्षित तरीके से बहाल करने की है।

लोगों को राहत का इंतजार

कासगंज के इन गांवों में बाढ़ ने लोगों की जिंदगी को कई स्तरों पर प्रभावित किया है। बिजली बंद होने से रात का डर बढ़ गया है, घरों के आसपास पानी और जहरीले जीवों की मौजूदगी चिंता बढ़ा रही है, जबकि खेतों में जलभराव ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। अब ग्रामीणों की नजर गंगा के जलस्तर में कमी और प्रशासन की ओर से राहत एवं सुरक्षा इंतजामों पर टिकी है।

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