Moradabad Crime: यूपी में फिर नशीले कफ सिरप का खेल शुरू, 2 हजार शीशियों के साथ एक तस्कर गिरफ्तार

Moradabad Crime: मुरादाबाद में पुलिस ने 2 हजार शीशी प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। मेडिकल स्टोर की आड़ में चल रहे इस नेटवर्क के दो मुख्य आरोपी फरार हैं।


November 8, 2026 • by

Moradabad Crime News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप की तस्करी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। कटघर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक कार से कोडीन सिरप की 2 हजार शीशियां बरामद की हैं। मौके से करूला निवासी एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी मेडिकल स्टोर की आड़ में नशे के लिए प्रतिबंधित कफ सिरप की सप्लाई करने वाले गिरोह का हिस्सा था। इस नेटवर्क के तार उत्तराखंड के रुड़की से जुड़े हुए हैं।

मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दबोचा आरोपी

एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने शनिवार को अपने कार्यालय में सीओ कटघर गौरव त्रिपाठी के साथ प्रेसवार्ता कर पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि मुखबिर से सूचना मिलने के बाद कटघर थाना प्रभारी संजय सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इलाके में गश्त और चेकिंग शुरू की थी।

शनिवार तड़के पुलिस टीम ने कल्याणपुर अंडरपास के पास एक कार को रोककर तलाशी ली। कार में कोडीन कफ सिरप की करीब 2 हजार शीशियां रखी हुई थीं। पुलिस ने कार सवार करूला निवासी फईम को गिरफ्तार कर लिया और बरामद सिरप को कब्जे में लेकर उसे थाने ले आई।

रुड़की से बिल के साथ मंगाते थे प्रतिबंधित सिरप

पुलिस पूछताछ में फईम ने गिरोह के काम करने के तरीके के बारे में जानकारी दी। उसके मुताबिक, मूंढापांडे थाना क्षेत्र के गांव सक्टूनगला निवासी नवाज ने अप्रैल 2026 में भोजपुर में मेडिकल स्टोर संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग से लाइसेंस लिया था। इसके बाद उसने गांव के ही आसिफ को अपना पार्टनर बना लिया।

दोनों आरोपी मेडिकल स्टोर की आड़ में कोडीन कफ सिरप का कारोबार कर रहे थे। इसके लिए उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रुड़की स्थित भगवानपुर क्षेत्र की कृष्णा विहार कॉलोनी निवासी राणा नाम के व्यक्ति से सिरप मंगाया जाता था। मेडिकल स्टोर के नाम पर बाकायदा बिल बनवाकर सिरप की खेप मुरादाबाद पहुंचाई जाती थी।

153 रुपये में खरीदकर 250 रुपये तक में बेचते थे शीशी

पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य रुड़की से कोडीन सिरप की एक शीशी 153 रुपये में खरीदते थे। इसके बाद उसे 230 से 250 रुपये प्रति शीशी की दर से बेच दिया जाता था। इस तरह प्रत्येक शीशी पर 77 से 97 रुपये तक का अंतर रहता था।

गिरोह के सदस्य मेडिकल स्टोर के नाम पर सिरप की खेप मंगवाते और फिर उसे मुरादाबाद के अलावा रामपुर और संभल समेत आसपास के जिलों में अलग-अलग स्थानों पर नशे के लिए सप्लाई करते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक कितनी खेप मंगाई और बेची जा चुकी हैं।

सप्लाई पहुंचाने के मिलते थे पांच हजार रुपये

पूछताछ में फईम ने बताया कि रुड़की से भेजा गया कफ सिरप मुरादाबाद के हनुमानमूर्ति स्थित एक ट्रांसपोर्ट के जरिए पहुंचता था। इसके बाद वह ट्रांसपोर्ट से सिरप की खेप अपनी कार में लोड करता और भोजपुर थाना क्षेत्र के सिरसवां दोराहा लेकर जाता था।

वहां नवाज और आसिफ को सिरप सौंप दिया जाता था। इस काम के बदले फईम को पांच हजार रुपये मिलते थे। आरोपी ने पुलिस को बताया कि शनिवार रात भी रुड़की से सिरप की खेप आई थी। वह उसी खेप को लेकर दोनों मुख्य आरोपियों तक पहुंचाने जा रहा था, तभी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

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मेडिकल स्टोर के नाम पर लिया कमरा

फईम से पूछताछ के बाद पुलिस टीम उसे लेकर भोजपुर थाना क्षेत्र के सिरसवां दोराहा पहुंची। यहां उस स्थान की जांच की गई, जहां गिरोह के सदस्य कफ सिरप की खेप पहुंचाते थे। पुलिस को वहां एक कमरा मिला, जिसके बाहर छोटे से बोर्ड पर मेडिकल स्टोर लिखा हुआ था। लेकिन जब पुलिस ने कमरे के अंदर जाकर तलाशी ली तो वहां कोई दवा नहीं मिली। इसके बजाय पूरा कमरा पुआल से भरा हुआ था। इस खुलासे के बाद पुलिस गिरोह के इस्तेमाल किए जा रहे अन्य ठिकानों और सप्लाई के तरीकों की भी जांच कर रही है।

मुख्य आरोपी नवाज और आसिफ की तलाश में पुलिस

एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह के मुताबिक, गिरफ्तार फईम गिरोह का केवल एक सदस्य था। वह मुख्य आरोपी नवाज और आसिफ के निर्देश पर सिरप की खेप लाने और पहुंचाने का काम करता था। दोनों मुख्य आरोपी मेडिकल स्टोर की आड़ में रुड़की से प्रतिबंधित कफ सिरप मंगाकर मुरादाबाद, रामपुर और संभल में सप्लाई करते थे।

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पुलिस ने गिरफ्तार फईम को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। वहीं, मुकदमे में वांछित नवाज और आसिफ की तलाश की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह के संपर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और मेडिकल स्टोर के लाइसेंस का इस्तेमाल कर कितने समय से यह कारोबार चलाया जा रहा था।

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