Alcoholic Liver Disease: शराब का लगातार सेवन शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन इसका सबसे गंभीर असर लिवर पर देखने को मिलता है। लिवर शरीर में खून को साफ करने, पोषक तत्वों को प्रोसेस करने और कई जरूरी कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऐसे में जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से शराब का सेवन करता है, तो धीरे-धीरे लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि आखिर शराब पीने के कितने साल बाद लिवर खराब हो जाता है? क्या 5 साल, 10 साल या इससे भी ज्यादा समय लगता है? इस सवाल का जवाब जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि लिवर की बीमारी शुरुआती दौर में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी विकसित हो सकती है।
क्या शराब पीने के लिए कोई समय सीमा तय है
शराब पीने से लिवर को नुकसान पहुंचने का कोई निश्चित समय या साल निर्धारित नहीं है। इसका असर हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है। कुछ लोगों में लगातार शराब पीने के कुछ वर्षों के भीतर ही लिवर में फैट जमा होने लगता है, जबकि कुछ लोगों में लंबे समय तक शराब का सेवन करने के बावजूद गंभीर नुकसान के लक्षण देर से सामने आते हैं।
डॉक्टर ने बताई लिवर खराब होने की असली वजह
इस बारे में फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर और HOD डॉ. रमेश गर्ग बताते हैं कि शराब से लिवर को नुकसान पहुंचने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं होती। यह व्यक्ति की शराब पीने की मात्रा, सेवन के तरीके, उम्र, जेनेटिक फैक्टर, खानपान और पहले से मौजूद स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर निर्भर करता है।
कुछ लोगों में कम समय में ही लिवर पर इसका असर दिखाई देने लगता है, जबकि कुछ लोगों में गंभीर बीमारी विकसित होने में लंबा समय लग सकता है। इसलिए यह मानना गलत है कि कुछ साल तक शराब पीने से लिवर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
तीन चरणों में बढ़ सकती है बीमारी
डॉक्टर के अनुसार, शराब के लगातार सेवन से होने वाली लिवर की बीमारी आमतौर पर तीन प्रमुख चरणों में विकसित हो सकती है। शुरुआत में लिवर में फैट जमा होता है, इसके बाद सूजन और कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। अगर इस स्थिति को नजरअंदाज किया जाए और शराब का सेवन जारी रखा जाए, तो बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। आइए इन तीनों चरणों को विस्तार से समझते हैं।
पहला चरण: अल्कोहलिक फैटी लिवर
शराब से लिवर को नुकसान पहुंचने का शुरुआती चरण अल्कोहलिक फैटी लिवर कहलाता है। इस स्थिति में लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। शुरुआत में इसके कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते, जिसकी वजह से कई लोगों को पता भी नहीं चलता कि उनका लिवर प्रभावित हो रहा है। हालांकि, इस चरण में शराब का सेवन पूरी तरह बंद करने और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जीवनशैली में बदलाव करने से स्थिति में सुधार हो सकता है।
दूसरा चरण: अल्कोहलिक हेपेटाइटिस
जब शराब के सेवन से लिवर की कोशिकाओं को लगातार नुकसान पहुंचता है, तो लिवर में सूजन की समस्या विकसित हो सकती है। इस स्थिति को अल्कोहलिक हेपेटाइटिस कहा जाता है। इसमें लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। कुछ लोगों को थकान, भूख न लगना, पेट में दर्द, कमजोरी और पीलिया जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। गंभीर मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। ऐसे में शराब का सेवन बंद करना और विशेषज्ञ डॉक्टर से समय पर इलाज करवाना बेहद जरूरी है।
तीसरा चरण: लिवर सिरोसिस
शराब से होने वाली लिवर की बीमारी का सबसे गंभीर चरण लिवर सिरोसिस है। इस स्थिति में लिवर के स्वस्थ ऊतकों की जगह फाइब्रोसिस यानी निशान वाले ऊतक बनने लगते हैं। धीरे-धीरे लिवर की सामान्य संरचना और काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। सिरोसिस में लिवर को हुआ नुकसान स्थायी हो सकता है और गंभीर स्थिति में लिवर फेलियर जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। इस चरण में पेट और पैरों में सूजन, पीलिया तथा अन्य गंभीर जटिलताएं देखने को मिल सकती हैं।
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शुरुआत में इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
लिवर की बीमारी की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शुरुआती चरणों में कई बार इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। व्यक्ति सामान्य जीवन जीता रहता है और उसे पता भी नहीं चलता कि लिवर के अंदर नुकसान हो रहा है। हालांकि, बीमारी बढ़ने पर शरीर कुछ संकेत देने लगता है। इनमें लगातार थकान रहना, भूख कम लगना, पेट में सूजन, आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, पैरों में सूजन और पेशाब का रंग गहरा होना शामिल हो सकता है। इन लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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शराब पीने वालों को कब करवानी चाहिए लिवर की जांच
जो लोग नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं, उन्हें अपने लिवर की सेहत को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह पर समय-समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT), अल्ट्रासाउंड और जरूरत पड़ने पर फाइब्रोस्कैन जैसी जांच करवाई जा सकती है। इन जांचों से लिवर की स्थिति और संभावित नुकसान का पता लगाने में मदद मिलती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि केवल LFT सामान्य आने से लिवर की हर बीमारी पूरी तरह खारिज नहीं होती। इसलिए जांच के नतीजों का आकलन डॉक्टर से करवाना जरूरी है।
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लिवर को बचाने के लिए क्या है सबसे बेहतर तरीका
डॉक्टर के मुताबिक, शराब का सेवन बंद करना लिवर को शराब से होने वाले नुकसान से बचाने का सबसे प्रभावी कदम है। शराब की कोई भी मात्रा लिवर के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा सकती। खासतौर पर जिन लोगों में पहले से लिवर की बीमारी का पता चल चुका है, उन्हें शराब से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को लिवर सिरोसिस या शराब की लत है, तो विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है। शराब पर निर्भर व्यक्ति को अचानक सेवन बंद करने पर गंभीर विड्रॉल लक्षण हो सकते हैं, इसलिए जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय निगरानी में ऐसा करना चाहिए।

Sunny Singh, UP News 24 की डिजिटल डेस्क पर कार्यरत हैं। उन्हें डिजिटल पत्रकारिता और समाचार लेखन का लगभग 4 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर के दौरान India Update 24 और Hind 24 में भी काम किया है। वर्तमान में वे UP News 24 के लिए विभिन्न विषयों पर समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट तैयार करते हैं। Read More..










