Moradabad Leopard Rescue News: मुरादाबाद जिले में मानव और तेंदुए के बीच बढ़ते टकराव की आशंका ने पूरे प्रशासनिक अमले की नींद उड़ा दी है। ठाकुरद्वारा और कांठ तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांवों में तेंदुए की बार-बार आवाजाही से दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों की सुरक्षा और तेंदुए को बिना नुकसान पहुंचाए रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग ने अब तक का सबसे बड़ा सर्च और अलर्ट ऑपरेशन शुरू किया है।
दर्जनों गांवों में बिछा पिंजरों का जाल
संवेदनशील इलाकों में किसी भी अनहोनी को टालने के लिए वन विभाग की टीमें जमीन पर उतर चुकी हैं। ठाकुरद्वारा के बलियावाला, बल्लमगढ़, बाहपुर, लालापुर पीपलसाना, सूरजननगर, सुल्तानपुर दोस्त और सरकड़ा परम जैसे गांवों में भारी घेराबंदी की गई है। वहीं कांठ क्षेत्र के रम्पुरा, दयानाथपुर, कुपावली, चौहरा रसूलपुर, सलेमपुर, राजीपुर और पाइंदापुर में पिंजरे लगाकर लगातार चेकिंग की जा रही है।
लोकेशन मिलते ही एक्शन में रेस्क्यू टीम

प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि कंट्रोल रूम में जैसे ही तेंदुए की मूवमेंट की खबर आती है, रेस्क्यू टीम तुरंत हरकत में आ जाती है। किशनपुर गामड़ी, सरकड़ा परम और मुल्तावान जैसे बेहद संवेदनशील इलाकों में तेंदुए के पदचिन्हों (पगमार्क) को ट्रैक करके रणनीतिक जगहों पर ट्रैप केज लगाए जा रहे हैं।
लाउडस्पीकर से गूंज रही चेतावनी की आवाज
केवल रेस्क्यू ही नहीं, बल्कि गांवों में लोगों को सतर्क करने के लिए प्रचार वाहनों को उतारा गया है। मलाकपुर सेमली, बहादरनगर, शेरपुर पट्टी, गामड़ी, लालापुर पीपलसाना, बाहपुर, पीपली घनश्याम, मेंढया और सुल्तानपुर दोस्त जैसे इलाकों में लाउडस्पीकर के जरिए चेतावनी जारी की जा रही है ताकि लोग सतर्क रहें और घरों से बाहर निकलते वक्त सावधानी बरतें।
24 घंटे पैनी नजर रख रहीं रेस्क्यू टीमें

जंगलों और खेतों से सटे इलाकों में वन विभाग की रेस्क्यू टीमें दिन-रात का पहरा दे रही हैं। तेंदुए की हर एक चाल पर बारीक नजर रखी जा रही है। किसी भी अप्रिय घटना से पहले स्थिति को नियंत्रित करने के लिए टीमें लगातार स्थानीय ग्रामीणों के संपर्क में हैं और इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है।
मासूमों को तेंदुए के खतरे से बचाने की पहल
खतरे की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने अब स्कूलों का रुख किया है। बच्चों और शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग और गाइडलाइंस दी जा रही हैं। बच्चों को साफ हिदायत दी गई है कि तेंदुआ या उसकी हलचल दिखने पर उसे घेरने, शोर मचाने या उसके पास जाने के बजाय तुरंत अपने अध्यापकों, परिजनों और वन विभाग को सूचित करें।
40 गांवों में तैनात हुए 49 लोहे के पिंजरे
मुरादाबाद के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी मानी जा रही है। जिले के कुल 40 अति-संवेदनशील गांवों में 49 भारी पिंजरे लगाए गए हैं। इन पिंजरों की नियमित रूप से निगरानी की जा रही है ताकि तेंदुए के आते ही उसे सुरक्षित तरीके से ट्रैप किया जा सके।
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40 नाइट-विजन कैमरों से रखी जा रही नजर
तेंदुओं की सही संख्या, उनकी उम्र और गतिविधियों को समझने के लिए वन विभाग ने हाई-टेक 40 ट्रैप कैमरे मैदान में उतारे हैं। ये कैमरे झाड़ियों और संभावित रास्तों पर छिपाकर लगाए गए हैं, जो अंधेरे में भी तेंदुए की हर हरकत को रिकॉर्ड कर रहे हैं।
वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की एंट्री

इस बड़े ऑपरेशन को और ज्यादा सटीक बनाने के लिए एक्सपर्ट संस्था ‘वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ (WTI) की विशेष टीम भी मुरादाबाद पहुंच चुकी है। WTI के विशेषज्ञ कैमरों से प्राप्त फुटेज, तेंदुए के व्यवहार और उसकी आवाजाही के पैटर्न का वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं।
वन विभाग की अपील- घबराएं नहीं, सावधान रहें
वन विभाग ने आम जनता से पैनिक न फैलाने और सतर्कता बरतने की अपील की है। विशेषकर उन किसानों और मजदूरों को सावधान किया गया है जो तड़के या देर शाम खेतों की सिंचाई और रखवाली के लिए जाते हैं।
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खेतों में जाने से पहले बनाएं समूह
अकेले बाहर निकलना इस समय जानलेवा साबित हो सकता है। प्रशासन की ओर से गाइडलाइन जारी की गई है कि खेतों या जंगल के पास हमेशा 3 से 4 लोगों के समूह में ही जाएं। एक साथ रहने पर तेंदुए के हमला करने का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
शोर मचाकर तेंदुए को दें अपनी मौजूदगी का संकेत

खेतों में काम करते समय या पैदल चलते वक्त आपस में तेज आवाज में बात करें, गाना गाएं या लाठी-डंडे को जमीन पर पटकते हुए चलें। इंसानी आवाज और आहट सुनकर तेंदुआ आमतौर पर अपना रास्ता बदल लेता है और हमले की नौबत नहीं आती।
रात के अंधेरे में लाठी और टॉर्च ही सहारा
रात के समय बहुत जरूरी होने पर ही बाहर निकलें। यदि बाहर जाना ही पड़े तो अपने साथ तेज रोशनी वाली टॉर्च और मजबूत लाठी जरूर रखें। अंधेरे और झाड़ियों वाले रास्तों पर अकेले जाने से पूरी तरह बचें।
बच्चों और मवेशियों को बाड़े में रखें कैद
छोटे बच्चों को भूलकर भी घर के बाहर या आंगन में अकेला न छोड़ें। इसके अलावा अपने मवेशियों और पालतू जानवरों को खुले में बांधने के बजाय पूरी तरह से ढके हुए और सुरक्षित बाड़े में ही बंद रखें, क्योंकि तेंदुआ अक्सर आसान शिकार की तलाश में बस्तियों का रुख करता है।
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तेंदुआ दिखे तो खुद पकड़ने की गलती न करें
यदि गांव या आसपास तेंदुए की मौजूदगी दिखाई दे, तो अपनी जान जोखिम में डालकर उसे पकड़ने, फोटो खींचने, उसका पीछा करने या घेरने की गलती बिल्कुल न करें। ऐसा करने पर तेंदुआ हमलावर हो सकता है। तुरंत वन विभाग या स्थानीय पुलिस को सूचना दें।
ग्रामीणों के सहयोग से ही टलेगा बड़ा हादसा
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीणों के सक्रिय सहयोग के बिना इस मानव-जीव संघर्ष को रोकना असंभव है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या तेंदुए के पगमार्क दिखते ही तुरंत विभाग को सूचित करें ताकि समय रहते रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा किया जा सके।

Sunny Singh उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध और स्थानीय समाचारों को कवर करने वाले पत्रकार हैं। उन्हें डिजिटल पत्रकारिता और समाचार लेखन का लगभग 4 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने India Update 24 और Hind 24 में कार्य किया है। वर्तमान में वे UP News 24 की डिजिटल डेस्क पर कार्यरत हैं।











