चीनी के दामों में लगी आग: पहली बार 65 रूपये किलो पहुंची कीमत, जानें क्यों महंगी हुई चीनी

Sugar Price Hike: त्योहारी सीजन से पहले चीनी के दाम 65 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। उत्पादन में कमी, सीमित सप्लाई, एथेनॉल उत्पादन को प्राथमिकता और बढ़ती मांग के बीच कीमतों में तेजी आई है।


August 20, 2026 by

Sugar Price Hike News: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही चीनी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। खुदरा बाजार में चीनी का भाव पहली बार करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। कारोबारियों के मुताबिक, पिछले करीब 15 दिनों में चीनी की कीमत में लगभग 15 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। अचानक आई इस तेजी ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ मिठाई कारोबारियों की चिंता भी बढ़ा दी है।

15 दिनों में करीब 15 रुपये की बढ़ोतरी

बाजार में कुछ दिन पहले तक जिस चीनी की कीमत 48 से 50 रुपये प्रति किलो के आसपास थी, अब वही चीनी कई जगहों पर 60 से 65 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। कारोबारियों का कहना है कि सीजन के अंतिम दौर में बाजार में उपलब्ध चीनी का स्टॉक तेजी से कम हुआ है। दूसरी ओर मांग लगातार बनी हुई है, जिसके कारण कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।

मांग के मुकाबले आधी आपूर्ति का दावा

कारोबारियों के अनुसार इस समय बाजार में जितनी चीनी की मांग है, उसकी तुलना में करीब आधी ही आपूर्ति हो पा रही है। आपूर्ति में कमी और सीमित स्टॉक के कारण थोक तथा खुदरा दोनों बाजारों में कीमतें ऊपर जा रही हैं। अगर आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो चीनी के भाव में और तेजी देखने को मिल सकती है।

त्योहारों से पहले बढ़ेगी चीनी की मांग

Sugar Price Hike

आने वाले दिनों में रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और इसके बाद दशहरा तथा दिवाली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं। त्योहारों के दौरान मिठाइयों, बिस्कुट, कन्फेक्शनरी और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ती है। ऐसे में चीनी की खपत भी सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ने की संभावना है। कारोबारियों को आशंका है कि बढ़ती मांग और सीमित उपलब्धता के बीच कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।

पहली बार 60 रुपये के पार पहुंचा भाव

फुटकर किराना व्यापारी संतोष गुप्ता के अनुसार करीब 15 दिन पहले चीनी 48 से 50 रुपये किलो के भाव में बिक रही थी, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर 65 रुपये किलो तक पहुंच गई है। वहीं फतेहगंज के थोक कारोबारी संजय जयसवानी के मुताबिक, चीनी का भाव पहली बार 60 रुपये प्रति किलो के स्तर से ऊपर पहुंचा है। बाजार में आई इस तेजी को कारोबारी मौजूदा स्टॉक और सप्लाई की स्थिति से जोड़कर देख रहे हैं।

ये भी पढ़ें: जर्जर घर को AI ने बताया पक्का, हजारों गरीबों का PM Awas आवेदन हुआ रिजेक्ट; जानें पूरा मामला

उत्पादन में भी आई कमी

कारोबारियों का कहना है कि इस साल चीनी का उत्पादन पिछले साल की तुलना में करीब 5 फीसदी कम रहा है। उत्पादन घटने का सीधा असर बाजार में उपलब्ध चीनी के स्टॉक पर पड़ा है। चीनी मिलों का नया पेराई सत्र आमतौर पर अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में शुरू होता है। ऐसे में नए उत्पादन के बाजार में आने तक मौजूदा स्टॉक पर ही काफी हद तक निर्भरता बनी रहती है।

एथेनॉल उत्पादन को मिली प्राथमिकता

चीनी की कीमतों में तेजी की एक वजह एथेनॉल उत्पादन को भी माना जा रहा है। कारोबारियों के मुताबिक, चीनी मिलों ने अधिक लाभ को देखते हुए गन्ने से चीनी बनाने की बजाय एथेनॉल उत्पादन को प्राथमिकता दी। पेट्रोल और शराब बनाने वाली कंपनियों की ओर से एथेनॉल की मांग बढ़ने के कारण गन्ने के इस्तेमाल का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन की ओर गया, जिसका असर चीनी के उत्पादन और बाजार में उपलब्धता पर पड़ा।

मिठाई कारोबार पर सीधा असर

Sugar Price Hike News

चीनी की कीमत बढ़ने का सबसे सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ रहा है। आने वाले त्योहारों को देखते हुए मिठाई की मांग बढ़ने वाली है, लेकिन दूसरी तरफ कच्चे माल की लागत भी लगातार बढ़ रही है। यूपी आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष और मिठाई कारोबारी अविनाश त्रिपाठी के मुताबिक, मिठाई बनाने में चीनी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और करीब 20 फीसदी तक चीनी का इस्तेमाल होता है।

ये भी पढ़ें: बिजनौर में हरिद्वार मार्ग पर बह रहा मालन का पानी, हजारों बीघा फसल प्रभावित

खोये से लेकर मिठाई तक बढ़ सकती है लागत

मिठाई कारोबारियों के अनुसार एक किलो खोये में करीब 200 ग्राम चीनी का इस्तेमाल होता है। ऐसे में चीनी के दाम में होने वाली बढ़ोतरी सीधे मिठाई की उत्पादन लागत को प्रभावित करती है। अगर चीनी की कीमत आगे भी बढ़ती है तो इसका असर मिठाइयों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। त्योहारों के समय मिठाई की बढ़ती मांग के बीच कारोबारियों के लिए लागत और बिक्री मूल्य के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

कच्चे माल की लागत 25 से 30 फीसदी बढ़ी

मिठाई कारोबारियों का कहना है कि कच्चे माल की लागत पहले ही करीब 25 से 30 फीसदी तक बढ़ चुकी है। ऐसे में चीनी की कीमत में अचानक आई तेजी ने कारोबारियों के मुनाफे को और प्रभावित किया है। कारोबारियों के मुताबिक, व्यावसायिक सिलिंडर पर सरकार की ओर से दी गई 375 रुपये की राहत भी बढ़ती लागत के सामने पर्याप्त साबित नहीं हो रही है।

सरकार ने स्टॉक को लेकर बदला नियम

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने स्टॉक को लेकर भी नया नियम लागू किया है। सरकार की अधिसूचना के अनुसार, हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की गई है। ऐसे डीलर अब 15 दिनों से अधिक का चीनी स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह व्यवस्था 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगी।

स्टॉक लिमिट का मकसद क्या है?

सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ने की उम्मीद है। स्टॉक की सीमा तय करने का उद्देश्य बाजार में जरूरत से ज्यादा भंडारण को नियंत्रित करना और उपलब्ध चीनी की सप्लाई को व्यवस्थित रखना है। आने वाले महीनों में त्योहारों के दौरान चीनी की खपत बढ़ने वाली है, इसलिए बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

त्योहारों में बढ़ती है चीनी की खपत

अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली समेत कई बड़े त्योहार आते हैं। इन मौकों पर घरों में मिठाइयां और पकवान बनाए जाते हैं, जबकि दुकानों पर मिठाई, बिस्कुट और कन्फेक्शनरी उत्पादों की बिक्री भी बढ़ जाती है। यही वजह है कि त्योहारों से पहले कंपनियां और कारोबारी आमतौर पर अपने स्टॉक की तैयारी शुरू कर देते हैं।

ये भी पढ़ें: आजम खान-जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े 10 ठिकानों पर ED की रेड, रामपुर से दिल्ली-सहारनपुर तक छापेमारी

बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियों पर भी नजर

चीनी की मांग केवल घरेलू और मिठाई कारोबार तक सीमित नहीं है। बिस्कुट और कन्फेक्शनरी बनाने वाली कंपनियां भी त्योहारों से पहले उत्पादन बढ़ाने के लिए चीनी का स्टॉक तैयार करती हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ सकती है। अगर उत्पादन और आपूर्ति मांग के अनुरूप नहीं बढ़ी तो बाजार में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

क्या आगे और बढ़ेंगे चीनी के दाम?

मौजूदा बाजार स्थिति को देखते हुए कारोबारियों और विशेषज्ञों की चिंता यह है कि आने वाले दिनों में चीनी के भाव में और तेजी आ सकती है। हालांकि भविष्य की कीमत कई कारकों पर निर्भर करेगी, जिनमें बाजार में उपलब्ध स्टॉक, चीनी मिलों का उत्पादन, एथेनॉल की मांग और त्योहारों के दौरान खपत प्रमुख हैं। नए पेराई सत्र के शुरू होने और नई चीनी बाजार में आने के बाद ही आपूर्ति की स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

आम लोगों की जेब पर पड़ेगा असर

चीनी की कीमत में बढ़ोतरी का असर केवल चीनी खरीदने वाले उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। मिठाई, बिस्कुट, कन्फेक्शनरी और चीनी का इस्तेमाल करने वाले दूसरे उत्पादों की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है। त्योहारों के दौरान जब इन उत्पादों की मांग बढ़ती है, तब बढ़ी हुई उत्पादन लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक कीमतों के रूप में पहुंच सकता है।

बाजार अब सरकार और नई सप्लाई पर टिका

फिलहाल चीनी बाजार में सबसे बड़ा सवाल उपलब्धता और कीमत का है। एक तरफ उत्पादन में कमी और मौजूदा स्टॉक घटने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी तरफ त्योहारों के कारण मांग बढ़ने वाली है। सरकार की नई स्टॉक सीमा और आने वाले पेराई सत्र के बीच बाजार की दिशा तय होगी। अगर आपूर्ति बढ़ती है तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, लेकिन मांग के मुकाबले सप्लाई कमजोर रही तो चीनी के दाम ऊंचे बने रहने की संभावना है।

Share: