Lakhimpur Kheri News: उत्तराखंड और नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब उत्तर प्रदेश के तराई इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। लखीमपुर खीरी जिले की शारदा नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। नदी की तेज धार लगातार कृषि योग्य भूमि को काट रही है और अब तक करीब 50 एकड़ उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी है।
हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई गांवों में नदी का बहाव आबादी के बेहद करीब पहुंच गया है। किसानों की गन्ने समेत अन्य फसलें देखते ही देखते नदी में समा रही हैं, जिससे ग्रामीणों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
घरों तक पहुंचा नदी का खतरा
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में गोला तहसील के बिजुआ ब्लॉक की ग्राम पंचायत गुजारा का मजरा सिंघिया शामिल है। यहां शारदा नदी का कटान लगातार तेज होता जा रहा है। ग्राम प्रशासक सतनाम सिंह ने बताया कि नदी अब उनके घर से मात्र 100 से 150 मीटर की दूरी पर रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटान इसी रफ्तार से जारी रहा तो आने वाले दिनों में कई मकान भी नदी में समा सकते हैं। इससे पूरे गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है।
पिछले साल से ज्यादा भयावह स्थिति
ग्रामीणों के मुताबिक पिछले वर्ष भी शारदा नदी ने सिंघिया गांव की सैकड़ों एकड़ जमीन को अपने आगोश में ले लिया था, लेकिन इस बार हालात पहले से कहीं अधिक गंभीर हैं। नदी का कटान तेजी से आगे बढ़ रहा है और खेतों के साथ-साथ अब आबादी वाले क्षेत्रों की ओर भी बढ़ने लगा है। ग्रामीण लगातार प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
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प्रशासन ने शुरू किया नुकसान का आकलन
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार सदर सुनील कुमार ने लेखपाल राकेश शुक्ला को मौके पर भेजा है। लेखपाल लगातार प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं और कटान से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन तैयार किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाया जा सके।
तटबंध निर्माण की उठी मांग
कटान से परेशान ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से तत्काल तटबंध निर्माण तथा बचाव कार्य शुरू कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो पूरा गांव नदी की चपेट में आ सकता है। किसानों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से तैयार की गई उपजाऊ जमीन कुछ ही दिनों में नदी निगल रही है।
ग्रंट नंबर 12 में भी हालात गंभीर
फूलबेहड़ क्षेत्र के ग्रंट नंबर 12 गांव के पास भी शारदा नदी का कटान लगातार जारी है। यहां नदी फसलों के साथ-साथ उपजाऊ कृषि भूमि को तेजी से काट रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों से जारी कटान के कारण खेतों में खड़ी फसलें नदी में समा रही हैं। इतना ही नहीं, गांव को जोड़ने वाली करीब 300 मीटर लंबी पक्की सड़क भी नदी में समा चुकी है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने किया निरीक्षण
गुरुवार को निघासन तहसीलदार देवेंद्र त्रिपाठी और नायब तहसीलदार अभिषेक कुमार ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान क्षेत्रीय लेखपाल, आपदा मित्र और कई ग्रामीण भी मौजूद रहे। प्रशासन ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की बात कही है।
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मोहाना नदी ने भी दिखाए तेवर
केवल शारदा नदी ही नहीं, बल्कि भारत-नेपाल सीमा पर बहने वाली मोहाना नदी भी अब खतरा बनती जा रही है। तिकुनियां क्षेत्र के जसनगर गांव में नदी ने तेज कटान शुरू कर दिया है। दो किसानों के खेत नदी में कटने लगे हैं और कटान अब धीरे-धीरे तटबंध की ओर बढ़ रहा है। इससे स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
सिंचाई विभाग की योजनाएं हुईं नाकाम
ग्रामीणों का आरोप है कि मोहाना नदी को रोकने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से किए गए सभी प्रयास विफल साबित हुए हैं। जियो ट्यूब और अन्य सुरक्षा इंतजाम नदी के तेज बहाव के सामने टिक नहीं सके। नदी अब बंधे के उत्तर बसे लोगों के घरों और मंदिर के बेहद करीब पहुंच चुकी है, जिससे किसी भी समय बड़ा नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।
पूरनपुर में भी बढ़ा भूमि कटान
पीलीभीत जिले के पूरनपुर स्थित ट्रांस शारदा क्षेत्र में भी शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ भूमि कटान तेज हो गया है। पहले से 13 किसानों की जमीन नदी में समा चुकी थी, अब चार और किसानों के खेत कटान की चपेट में आ गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार अब तक करीब 30 एकड़ कृषि भूमि नदी में समा चुकी है, जबकि इससे पहले भी लगभग 70 एकड़ जमीन नदी निगल चुकी थी। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है।
गांवों पर मंडराने लगा खतरा
हजारा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि नदी अब गांव से महज 300 मीटर की दूरी पर पहुंच गई है। यदि कटान इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में गांव भी खतरे की जद में आ सकता है। किसानों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा उपाय करने और कटान रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग की है।
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बनबसा बैराज से छोड़ा गया भारी मात्रा में पानी
इस बीच शारदा नदी में उत्तराखंड स्थित बनबसा बैराज से 1.21 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ा है। यह अतिरिक्त पानी शुक्रवार देर शाम तक प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसके चलते प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है।
डीएम ने जारी किया हाई अलर्ट
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने कलीनगर और पूरनपुर तहसील प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है और लोगों को नदियों के किनारे जाने से मना किया गया है। तटीय गांवों में जलभराव और संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि फिलहाल जिले में स्थानीय स्तर पर भारी बारिश नहीं हुई है, इसलिए तत्काल बाढ़ का खतरा नहीं है, लेकिन सतर्कता बरती जा रही है।

Tannu Chauhan एक अनुभवी डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार लेखन का लगभग 3 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने Royal Bulletin और Moradabad Live News में डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में वह UP News 24 के लिए विभिन्न विषयों पर तथ्यात्मक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित समाचार एवं डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं।
