Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्रा का साया, जानिए राखी बांधने का सबसे शुभ समय!

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन 2026 पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। जानें राखी बांधने के दो शुभ मुहूर्त, राहुकाल का समय, शुभ योग और सही पूजा विधि।


August 28, 2026 by

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और अटूट रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन इस बार बेहद शुभ संयोगों के बीच मनाया जाएगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन 2026 पर कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। सबसे खास बात यह है कि इस वर्ष राखी पर्व पर भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा समाप्त होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, शुभ कार्य के लिए राहुकाल से बचने की सलाह दी गई है।

दो शुभ समय सबसे खास

Raksha Bandhan 2026

ज्योतिषाचार्य डॉ. पूनम वार्ष्णेय के अनुसार, शुक्रवार को भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए दो श्रेष्ठ मुहूर्त रहेंगे। पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06:20 बजे से 09:49 बजे तक रहेगा। इसके बाद दूसरा शुभ समय दोपहर 12:20 बजे से शाम 04:40 बजे तक रहेगा। इन दोनों समयावधियों में बहनें धार्मिक परंपरा के अनुसार भाई को तिलक लगाकर रक्षासूत्र बांध सकती हैं।

राहुकाल में राखी बांधने से बचें

रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2026) के दिन सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में राहुकाल को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है। इसलिए बहनों को सलाह दी गई है कि इस अवधि में राखी बांधने से बचें। यदि सुबह का पहला मुहूर्त छूट जाए तो राहुकाल समाप्त होने के बाद दोपहर 12:20 बजे से शाम 04:40 बजे तक मिलने वाले दूसरे शुभ मुहूर्त में राखी बांधी जा सकती है।

दुर्लभ योगों का महासंयोग

ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्रा के मुताबिक, इस बार रक्षाबंधन पर सौम्य योग, बुधादित्य योग और शुभ कर्तरी योग का एक साथ निर्माण हो रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से इन योगों को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि शुभ योगों में किए गए धार्मिक कार्यों का सकारात्मक प्रभाव परिवार और जीवन में सुख-समृद्धि से जुड़ा होता है।

ये भी पढ़ें: रक्षाबंधन पर मुफ्त यात्रा का असर: बस अड्डों पर पैर रखने की जगह नहीं, 4 गुना बढ़ी यात्रियों की भीड़

शतभिषा नक्षत्र में रक्षाबंधन

रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2026) के दिन शतभिषा नक्षत्र रहेगा। इसके साथ ही सूर्य देव अपनी स्वराशि सिंह में और चंद्रमा कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहों और नक्षत्रों की यह स्थिति पर्व के धार्मिक महत्व को और बढ़ाती है। मान्यता है कि ऐसे शुभ संयोग में भाई-बहन के बीच प्रेम और विश्वास की भावना मजबूत होती है।

भाइयों की उन्नति की कामना

raksha bandhan 2026 shubh muhurat

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में बहन द्वारा भाई के माथे पर तिलक लगाने और रक्षा सूत्र बांधने से भाई के जीवन में सुख, समृद्धि, उन्नति और दीर्घायु की कामना की जाती है। रक्षाबंधन केवल राखी बांधने की रस्म नहीं बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, जिम्मेदारी और सुरक्षा के संकल्प का पर्व भी माना जाता है।

राखी बांधते समय दिशा का रखें ध्यान

भाई का मुख पूर्व दिशा में: रक्षाबंधन की पूजा के दौरान दिशा का भी विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। पूर्व दिशा को सूर्य देव की दिशा माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सूर्य से जुड़ी इस दिशा में बैठने से यश, कीर्ति और सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

बहन उत्तर दिशा की ओर बैठे: राखी बांधते समय बहन का मुख उत्तर दिशा की ओर रखने की सलाह दी गई है। धार्मिक मान्यताओं में उत्तर दिशा को हिमालय और देवताओं के वास से जोड़ा जाता है। इसे सुख, समृद्धि और सकारात्मकता से संबंधित दिशा माना जाता है। इसलिए रक्षाबंधन की पूजा में दिशा के इस नियम का पालन करने की सलाह दी गई है।

ये भी पढ़ें: रामपुर में पनीर फैक्ट्री पर छापा, 76 किलो बदबूदार पनीर और 100 लीटर मक्खियों वाला दूध मिला

इस तरह पूरी करें राखी की पूजा

तिलक से करें शुभ शुरुआत: राखी की पूजा शुरू करते समय सबसे पहले भाई को उचित दिशा में बैठाएं। इसके बाद बहन भाई के माथे पर रोली और अक्षत यानी चावल से तिलक लगाए। तिलक के बाद भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा जाता है। यह रक्षा सूत्र भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और एक-दूसरे के प्रति प्रेम एवं विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

दीपक से उतारें आरती: रक्षासूत्र बांधने के बाद शुद्ध देसी घी के दीपक से भाई की आरती उतारें। इसके बाद भाई का मुंह मिठाई से मीठा कराएं। पूजा की इस परंपरा के बाद भाई भी अपनी बहन को उपहार देकर उसका मुंह मीठा कराता है। यह परंपरा भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और अपनत्व को और मजबूत करती है।

भाई निभाए रक्षा का संकल्प

Raksha Bandhan

रक्षाबंधन की रस्म पूरी होने के बाद भाई अपनी बहन को उपहार देकर जीवनभर उसकी रक्षा और हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने का संकल्प लेता है। बहन भी भाई की सुख-समृद्धि, लंबी उम्र और सफलता की कामना करती है। यही भाव इस पर्व को केवल धार्मिक अनुष्ठान से आगे बढ़ाकर भाई-बहन के भावनात्मक रिश्ते का खास त्योहार बनाता है।

रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2026) पर समय का रखें विशेष ध्यान

इन दो मुहूर्तों में बांधें राखी: रक्षाबंधन 2026 पर बहनों के लिए दो प्रमुख शुभ समय बताए गए हैं। पहला मुहूर्त सुबह 06:20 से 09:49 बजे तक और दूसरा मुहूर्त दोपहर 12:20 से शाम 04:40 बजे तक रहेगा। वहीं सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक राहुकाल बताया गया है। ऐसे में राखी बांधने की योजना बनाते समय राहुकाल को छोड़कर इन शुभ समयों में से किसी एक का चयन किया जा सकता है।

ये भी पढ़ें: नेपाल से गंडक नदी में बहकर आए 3 शव, SSB-SDRF ने निकाला बाहर, खौफनाक मंजर देख सहमे लोग

भद्रा को लेकर इस बार राहत

इस रक्षाबंधन पर भद्रा का प्रभाव नहीं होने की बात ज्योतिषाचार्यों ने बताई है। यही वजह है कि बहनों के लिए राखी बांधने का समय चुनना अपेक्षाकृत आसान रहेगा। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ कार्य करते समय राहुकाल से बचना बेहतर माना जाता है। परिवार अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार भी समय का ध्यान रख सकता है।

रक्षाबंधन 2026 (Raksha Bandhan 2026) का पर्व इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन कई शुभ योगों का संयोग बताया गया है। भद्रा का प्रभाव नहीं होने और दो प्रमुख शुभ मुहूर्त उपलब्ध होने से बहनों को राखी बांधने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। शुभ मुहूर्त में तिलक, रक्षासूत्र, आरती और मिठाई की परंपरा निभाकर भाई-बहन इस पवित्र रिश्ते को और मजबूत कर सकते हैं।

Share: