जौहर यूनिवर्सिटी विवाद ने पकड़ा तूल: राष्ट्रपति तक पहुंची शिकायत, मेरठ में सपा का जोरदार प्रदर्शन

Jauhar University: जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में मेरठ में सपा अल्पसंख्यक सभा ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया।


July 27, 2026 by

Jauhar University Protest Meerut: यूपी के मेरठ में सोमवार को समाजवादी पार्टी (सपा) अल्पसंख्यक सभा के कार्यकर्ताओं ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त किए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय में सौंपा और निष्पक्ष समाधान की अपील की।

ध्वस्तीकरण पर जताई चिंता

सपा अल्पसंख्यक सभा के पदाधिकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय के भवनों को गिराने जैसी कार्रवाई केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे हजारों छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों का भविष्य भी प्रभावित होगा। उनका कहना है कि शिक्षा से जुड़े किसी भी संस्थान पर कार्रवाई करते समय विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

कानूनी प्रक्रिया अपनाने की मांग

कानूनी प्रक्रिया अपनाने की मांग

प्रदर्शन के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय की भूमि, निर्माण या किसी अन्य विषय को लेकर कोई विवाद है, तो उसका समाधान पूरी तरह कानून और संविधान के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए और जल्दबाजी में कोई कठोर निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।

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राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद सपा प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए। साथ ही प्रशासन से यह सुनिश्चित करने की भी अपील की गई कि शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।

राजनीतिक द्वेष का लगाया आरोप

सपा अल्पसंख्यक सभा ने आरोप लगाया कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय (Jauhar University) को राजनीतिक द्वेष की भावना से निशाना बनाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह विश्वविद्यालय क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था और इस प्रकार की कार्रवाई से शिक्षा के माहौल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

निर्माण को बताया नियमों के अनुरूप

जौहर विश्वविद्यालय (Jauhar University)

ज्ञापन में दावा किया गया कि विश्वविद्यालय का निर्माण उस समय किया गया था जब ग्राम सींगनखेड़ा ग्राम पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आता था और उस समय संबंधित विकास प्राधिकरण से अनुमति लेने का प्रावधान लागू नहीं था। प्रदर्शनकारियों के अनुसार 27 सितंबर 2024 को पहली बार ग्राम सींगनखेड़ा को रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया, जबकि विश्वविद्यालय (Jauhar University) का अधिकांश निर्माण उससे पहले ही पूरा हो चुका था।

छात्रों के हित में निर्णय की अपील

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रशासन और सरकार को किसी भी निर्णय से पहले छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका कहना था कि यदि कोई कानूनी विवाद है तो उसका समाधान न्यायिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत किया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था बाधित न हो और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय की स्थिति उत्पन्न न हो।

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आगे की रणनीति पर नजर

फिलहाल ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब सभी की नजर प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है। सपा अल्पसंख्यक सभा ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

जौहर विश्वविद्यालय (Jauhar University) विवाद क्यों बना चर्चा का विषय?

जौहर विश्वविद्यालय (Jauhar University) इन दिनों प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई को लेकर चर्चा में है। विश्वविद्यालय के 38 भवनों को गिराए जाने की संभावना के बीच राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। समर्थकों का कहना है कि किसी भी कार्रवाई से पहले कानूनी प्रक्रिया और छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

जबकि प्रशासनिक स्तर पर मामले से जुड़े नियमों और तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जा रही है। ऐसे में जौहर विश्वविद्यालय (Jauhar University) का मामला शिक्षा, कानून और राजनीति तीनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण बन गया है।

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