Ramayana Movie Review: राम बने रणबीर फीके, रावण बनकर छाए यश! कैसी है 4000 करोड़ की फिल्म?

Ramayana Movie Review: 4000 करोड़ की मेगा बजट फिल्म 'रामायण पार्ट 1' रिलीज हो चुकी है। यश ने रावण बनकर महफिल लूट ली, वहीं रणबीर कपूर के राम का अभिनय फीका नजर आया। जानिए फिल्म के VFX, कहानी, अभिनय और कमजोरियों का पूरा रिव्यू।


November 5, 2026 • by

Ramayana Movie Review Hindi: भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित और महंगी फिल्मों में शामिल ‘रामायण पार्ट 1’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। निर्देशक नितेश तिवारी और निर्माता नमित मल्होत्रा की इस मेगा बजट फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में नजर आ रहे हैं।

फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच लंबे समय से जबरदस्त उत्साह था। इसकी भव्यता, शानदार वीएफएक्स और बड़े सितारों की मौजूदगी ने रिलीज से पहले ही इसे चर्चा का विषय बना दिया था। लेकिन सवाल यह है कि क्या 4000 करोड़ रुपये के विशाल बजट वाली यह फिल्म दर्शकों के दिलों में वही जगह बना पाएगी, जो रामायण की कहानी ने सदियों से बनाई हुई है? फिल्म देखने के बाद एक बात साफ नजर आती है कि तकनीकी रूप से यह बेहद शानदार है, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव के मामले में कुछ जगहों पर कमजोर पड़ जाती है।

सात साल का इंतजार

Ramayana Movie Review

साल 2017 में जब निर्माता नमित मल्होत्रा ने बड़े पर्दे पर रामायण बनाने की घोषणा की थी, तभी से इस प्रोजेक्ट को लेकर दर्शकों की उम्मीदें बढ़ने लगी थीं। मेकर्स का लक्ष्य भारतीय महाकाव्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक भव्य सिनेमाई अनुभव के रूप में पेश करना था। धीरे-धीरे फिल्म से बड़े कलाकार जुड़ते गए और इसका स्तर भी लगातार बढ़ता गया।

‘दंगल’ जैसी शानदार फिल्म बना चुके नितेश तिवारी को निर्देशन की जिम्मेदारी सौंपी गई। रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश जैसे सितारों की कास्टिंग ने फिल्म को और खास बना दिया। वहीं, संगीत के लिए एआर रहमान और हॉलीवुड के मशहूर संगीतकार हैंस जिमर का नाम जुड़ने से दर्शकों की उम्मीदें और बढ़ गईं।

उम्मीदों का बड़ा इम्तिहान

फिल्म के टीजर और ट्रेलर को दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला। एक तरफ लोग रामायण की भव्य दुनिया को बड़े पर्दे पर देखने के लिए उत्साहित थे, तो दूसरी तरफ मेकर्स के सामने ‘आदिपुरुष’ के बाद दर्शकों का भरोसा जीतने की चुनौती भी थी। फिल्म के गानों और वीएफएक्स को लेकर रिलीज से पहले कुछ आलोचनाएं भी हुईं। हालांकि, इन सबके बावजूद फिल्म को लेकर उत्सुकता कम नहीं हुई। अब फिल्म देखने के बाद कहा जा सकता है कि इसके विजुअल्स अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं, लेकिन भारतीय दर्शकों के भावनात्मक जुड़ाव को पूरी तरह हासिल करने में फिल्म कुछ पीछे रह जाती है।

रामायण पार्ट 1 की कहानी में क्या है खास?

फिल्म की शुरुआत अनुपम खेर की आवाज से होती है, जिन्होंने पक्षीराज जटायु को अपनी आवाज दी है। जटायु के वर्णन के जरिए दर्शकों को उस दौर में ले जाया जाता है, जब देवताओं और असुरों के बीच भयंकर युद्ध हुआ करता था। कहानी बताती है कि देवराज इंद्र ने असुरों को पराजित करने के बाद लंका का शासन कुबेर को सौंप दिया था। इस दौरान राक्षस कुल को धरती के नीचे कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताना पड़ा। इसी पृष्ठभूमि में महारानी कैकसी अपने पुत्र दशानन को खोया हुआ राज्य वापस हासिल करने के लिए प्रेरित करती हैं।

दशानन का कठिन तप

मां की बात सुनकर दशानन भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या शुरू कर देता है। उसकी तपस्या इतनी भीषण होती है कि पूरी पृथ्वी उसके ताप से प्रभावित होने लगती है। आखिरकार भगवान ब्रह्मा प्रकट होते हैं और दशानन उनसे अमरता का वरदान मांगता है। लेकिन अपने अहंकार में वह एक बड़ी भूल कर बैठता है। वह यह वरदान मांगना भूल जाता है कि कोई मनुष्य उसकी मृत्यु का कारण न बन सके। इसी वरदान के बाद दशानन कुबेर से लंका वापस छीन लेता है और धीरे-धीरे तीनों लोकों पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने लगता है।

राम अवतार की भूमिका

रावण के बढ़ते अत्याचारों और उसके अहंकार को समाप्त करने के लिए भगवान विष्णु श्रीराम के रूप में अवतार लेते हैं। इसके बाद कहानी अयोध्या पहुंचती है, जहां भगवान राम के जन्म, उनके बचपन, सीता स्वयंवर और वनवास से जुड़े प्रसंग दिखाए जाते हैं। कहानी के ये हिस्से दर्शकों के लिए नए नहीं हैं, क्योंकि रामायण की कथा भारतीय समाज में पहले से ही बेहद लोकप्रिय है। ऐसे में फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती इन परिचित प्रसंगों को नए अंदाज में पेश करना था।

वीएफएक्स का शानदार संसार

फिल्म के शुरुआती करीब 40 मिनट मुख्य रूप से रावण की कहानी, उसकी शक्ति और बदले की भावना पर केंद्रित हैं। इन दृश्यों में मेकर्स ने कल्पनाशीलता और तकनीक का शानदार इस्तेमाल किया है। देवराज इंद्र का ऐरावत, समुद्र की गहराइयों में भगवान विष्णु के दर्शन और रावण की तपस्या से जलती पृथ्वी जैसे दृश्य देखने में बेहद आकर्षक हैं। कई ऐसे दृश्य हैं, जिन्हें देखकर दर्शक कुछ देर के लिए फिल्म की काल्पनिक दुनिया में खो जाते हैं। हालांकि, कुछ एक्शन दृश्यों में वीएफएक्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल और रावण के हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट वाले हिस्से थोड़े बनावटी लगते हैं।

अयोध्या की खूबसूरती

रावण के लंकापति बनने के बाद फिल्म की कहानी अयोध्या की ओर बढ़ती है। यहां भगवान राम के जन्म से लेकर उनके वनवास तक की घटनाओं को दिखाया गया है। अयोध्या की भव्यता, महल, वन और सीता स्वयंवर के दृश्य तकनीकी रूप से काफी शानदार हैं। वन में राक्षसों के साथ युद्ध और वनवास के लिए प्रस्थान जैसे प्रसंग भी बड़े पर्दे पर प्रभावशाली दिखाई देते हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है, जब कहानी को आगे बढ़ाने के लिए कलाकारों के अभिनय और संवादों पर निर्भर रहना पड़ता है।

भावनाओं की कमी

फिल्म में राम और सीता के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों को काफी तेजी से दिखाया गया है। इस वजह से दर्शकों को उनके किरदारों को समझने और उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। राम और सीता के बीच संवाद भी सीमित हैं, जिससे दोनों के रिश्ते की गहराई पर्दे पर पूरी तरह उभर नहीं पाती। रामायण जैसी कहानी में जहां भावनाएं सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, वहां केवल भव्य दृश्य दर्शकों को लंबे समय तक बांधे नहीं रख सकते।

लंका में किरदारों की कमी

रावण की लंका को बेहद शानदार तरीके से तैयार किया गया है। वहां की इमारतें, वातावरण और दृश्य फिल्म के बड़े बजट को पर्दे पर दिखाते हैं। लेकिन इतनी विशाल दुनिया होने के बावजूद किरदारों को पर्याप्त जगह नहीं मिलती। मंदोदरी के किरदार में काजल अग्रवाल को भी बहुत सीमित संवाद दिए गए हैं। लंका के हिस्सों में रावण, शूर्पणखा और विद्युतजिह्वा जैसे कुछ किरदार ही प्रमुखता से दिखाई देते हैं। बाकी दुनिया काफी हद तक वीएफएक्स के सहारे खड़ी नजर आती है।

यश बने फिल्म की जान

Yash

रावण के किरदार में यश फिल्म के सबसे प्रभावशाली कलाकार बनकर सामने आते हैं। उनके व्यक्तित्व में रावण का अहंकार, ताकत और आक्रामकता दिखाई देती है। उन्होंने इस किरदार के लिए काफी मेहनत की है और कई दृश्यों में उनकी मौजूदगी बाकी कलाकारों पर भारी पड़ती है। हालांकि, कुछ एक्शन दृश्यों में उनका अंदाज रावण से ज्यादा किसी आधुनिक एक्शन फिल्म के हीरो जैसा लगता है। इसके बावजूद यश की स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। उनकी आवाज को शरद केलकर ने डब किया है, जिससे किरदार को एक अलग प्रभाव मिला है।

रणबीर कपूर का कमजोर पक्ष

Ranbir Kapoor

भगवान राम के किरदार में रणबीर कपूर ने शांत, विनम्र और शालीन दिखने की कोशिश की है। लेकिन कई दृश्यों में उनका अभिनय जरूरत से ज्यादा नियंत्रित और असहज नजर आता है। कुछ जगहों पर उनके चेहरे और शारीरिक हावभाव में झिझक दिखाई देती है। हालांकि, जटायु के साथ संवाद वाले दृश्य में रणबीर अपने भावों को बेहतर तरीके से व्यक्त कर पाते हैं। एक्शन दृश्यों में भी उनका काम ठीक है। लेकिन राम जैसे प्रभावशाली और भावनात्मक रूप से मजबूत किरदार के लिए जिस आत्मविश्वास और सहजता की जरूरत थी, वह पूरे समय दिखाई नहीं देती।

साई पल्लवी का सीमित इस्तेमाल

Sai Pallavi

माता सीता के किरदार में साई पल्लवी को देखकर दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं। वह अपनी स्वाभाविक अभिनय शैली के लिए जानी जाती हैं, लेकिन फिल्म में उनके किरदार को पर्याप्त विस्तार नहीं मिला। राम और सीता के बीच बहुत कम संवाद और साझा दृश्य होने के कारण दोनों की केमिस्ट्री को ठीक से समझ पाना मुश्किल है। कुछ दृश्यों में साई पल्लवी एक्शन करती भी नजर आती हैं और अपने किरदार को ठीक तरीके से निभाती हैं। हालांकि, उनके अभिनय की पूरी क्षमता का इस्तेमाल फिल्म में नहीं हो पाया।

लक्ष्मण बने रवि दुबे

लक्ष्मण के किरदार में रवि दुबे फिल्म की कमजोर कड़ियों में शामिल नजर आते हैं। उनके संवादों की गति और बोलने का अंदाज कई जगह किरदार के अनुरूप नहीं लगता। लक्ष्मण का स्वभाव क्रोधी जरूर था, लेकिन उनके व्यक्तित्व में मर्यादा और समझदारी भी थी। फिल्म में लिखे गए कुछ संवाद उनके चरित्र की गंभीरता को कम करते हैं। यहां परेशानी केवल अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि संवाद लेखन भी जिम्मेदार नजर आता है। अगर लक्ष्मण के किरदार को थोड़ा और बेहतर तरीके से लिखा जाता, तो रवि दुबे का प्रदर्शन भी ज्यादा प्रभावशाली हो सकता था।

अरुण गोविल का शानदार अभिनय

राजा दशरथ के किरदार में अरुण गोविल फिल्म के सबसे बेहतरीन कलाकारों में शामिल हैं। रामानंद सागर की रामायण में भगवान राम की भूमिका निभा चुके अरुण गोविल इस बार दशरथ के रूप में दिखाई देते हैं। उनके संवाद बोलने का तरीका, चेहरे के भाव और अभिनय की सहजता दर्शकों का ध्यान खींचती है। फिल्म में भावनात्मक दृश्यों को जिस मजबूती की जरूरत थी, वह अरुण गोविल के अभिनय में नजर आती है। उनके किरदार के साथ दर्शक आसानी से जुड़ाव महसूस कर पाते हैं।

रकुल प्रीत ने दिखाई प्रतिभा

शूर्पणखा के किरदार में रकुल प्रीत सिंह ने अच्छा काम किया है। लंबे समय बाद उन्हें ऐसा किरदार मिला है, जिसमें अभिनय दिखाने के पर्याप्त मौके नजर आते हैं। उन्होंने अपने किरदार के स्वभाव और भावनाओं को अच्छी तरह प्रस्तुत किया है। वहीं, कैकेयी के रूप में लारा दत्ता, विद्युतजिह्वा के किरदार में विवेक ओबेरॉय, इंद्र के रूप में कुणाल कपूर और मंथरा के किरदार में शीबा चड्ढा भी अपनी भूमिकाओं में अच्छे लगते हैं। जटायु की आवाज बनकर अनुपम खेर भी अपने प्रभावशाली वॉयस ओवर से एक खास दृश्य को यादगार बना देते हैं।

निर्देशक नितेश तिवारी से कहां हुई चूक

नितेश तिवारी ने ‘दंगल’ जैसी फिल्म के जरिए अपनी निर्देशन क्षमता साबित की है। लेकिन रामायण पार्ट 1 में उनका निर्देशन कई जगह उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता। फिल्म के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को थोड़ी जल्दी में समेट दिया गया है। अगर इन दृश्यों को अधिक समय दिया जाता, तो राम, सीता और लक्ष्मण जैसे किरदारों को बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता था। खासकर राम और सीता के रिश्ते तथा अयोध्या के पारिवारिक प्रसंगों को अधिक भावनात्मक विस्तार देने की जरूरत थी।

किरदारों के साथ न्याय नहीं

फिल्म में रावण को जितनी मजबूती और विस्तार दिया गया है, उतनी जगह दूसरे प्रमुख किरदारों को नहीं मिल पाई। लक्ष्मण के संवाद और उनके व्यक्तित्व को भी बेहतर बनाया जा सकता था। वहीं, मंदोदरी जैसे महत्वपूर्ण किरदार को सीमित स्क्रीन टाइम मिलने से कहानी का एक हिस्सा अधूरा महसूस होता है। निर्देशक के पास संपादन के दौरान इन कमियों को सुधारने का मौका था। कुछ दृश्यों को विस्तार देकर फिल्म के भावनात्मक पक्ष को मजबूत किया जा सकता था।

मर्यादा का रखा ध्यान

इन कमियों के बावजूद नितेश तिवारी की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने रामायण जैसे संवेदनशील और लोकप्रिय महाकाव्य को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करते समय इसकी मूल गरिमा बनाए रखने की कोशिश की है। कुछ दृश्यों को लेकर दर्शकों की अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन फिल्म का समग्र प्रस्तुतीकरण भव्यता और मर्यादा के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करता है।

वीएफएक्स और तकनीक ने जीता दिल

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका विजुअल इफेक्ट्स है। लंका, अयोध्या, जंगल और युद्ध के मैदान को जिस स्तर पर तैयार किया गया है, वह भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ा तकनीकी प्रयास नजर आता है। कई दृश्य ऐसे हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि मेकर्स ने अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को ध्यान में रखकर फिल्म का निर्माण किया है। देवताओं और असुरों के बीच युद्ध के दृश्य भी काफी प्रभावशाली हैं।

जटायु और रावण का युद्ध

फिल्म में जटायु और रावण के बीच होने वाला युद्ध सबसे शानदार दृश्यों में से एक है। इस सीक्वेंस में एक्शन, वीएफएक्स और भावनाओं का अच्छा तालमेल देखने को मिलता है। जटायु का संघर्ष और रावण की ताकत इस दृश्य को खास बनाते हैं। यह सीक्वेंस फिल्म के दूसरे भाग को लेकर भी दर्शकों की उम्मीदें बढ़ाता है।

दस सिरों वाला दृश्य

रावण के दस सिरों को केवल बाहरी रूप में दिखाने के बजाय उनके साथ संवाद करने का दृश्य भी फिल्म में शामिल किया गया है। इसे तकनीकी रूप से काफी शानदार तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इस दृश्य में यश का अभिनय भी प्रभाव छोड़ता है। यह फिल्म के उन हिस्सों में शामिल है, जहां वीएफएक्स और कलाकार का प्रदर्शन एक साथ काम करते नजर आते हैं।

निर्माता का बड़ा विजन

निर्माता नमित मल्होत्रा का उद्देश्य रामायण को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना था। इस दिशा में फिल्म का विजुअल स्केल और तकनीकी गुणवत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, केवल भव्यता किसी फिल्म को यादगार नहीं बना सकती। भारतीय दर्शकों के लिए रामायण सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि भावनाओं, आस्था और संस्कृति से जुड़ा महाकाव्य है। यही वजह है कि फिल्म में तकनीक के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी उतना ही जरूरी था।

उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा म्यूजिक

फिल्म में एआर रहमान और हैंस जिमर जैसे दिग्गज संगीतकारों का नाम जुड़ा होना अपने आप में बड़ी बात थी। दर्शकों को उम्मीद थी कि फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक हर महत्वपूर्ण दृश्य को यादगार बना देगा। लेकिन फिल्म देखते समय संगीत का प्रभाव उतना मजबूत नहीं लगता। कुछ जगह बैकग्राउंड स्कोर ठीक है, लेकिन ऐसा कोई खास संगीत बार-बार याद नहीं आता, जो दर्शकों के मन में लंबे समय तक बना रहे।

यादगार गानों की कमी

फिल्म में शामिल गाने भी बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ते। इतनी बड़ी और भावनात्मक कहानी के लिए संगीत को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए थी। खासकर राम के प्रसंगों, वनवास और युद्ध के दृश्यों में संगीत का प्रभाव और बेहतर हो सकता था। इस मामले में फिल्म दर्शकों की उम्मीदों से थोड़ी पीछे रह जाती है।

ये भी पढ़ें: रिलीज से पहले ही 200 करोड़ का हुआ मुनाफा, शाहरुख की ‘किंग’ ने रचा इतिहास

फिल्म में क्या है सबसे खास और कहां रह गई कमी?

फिल्म में जटायु और रावण के बीच युद्ध का दृश्य सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। इसके अलावा सीता को एक्शन करते दिखाने वाला हिस्सा भी दिलचस्प है। रावण के दस सिरों के साथ बातचीत वाला दृश्य तकनीकी रूप से काफी दमदार है। जटायु के निधन के बाद राम के साथ उनका संवाद फिल्म का एक भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दृश्य में अनुपम खेर की आवाज इसे और प्रभावशाली बना देती है।

इन बातों ने किया निराश

फिल्म में लक्ष्मण का अपने पिता के सामने माता कैकेयी के खिलाफ तलवार निकालना अटपटा लगता है। वहीं, रणबीर कपूर के कुछ दृश्यों में उनकी असहजता साफ दिखाई देती है। परशुराम के किरदार में उनका प्रयास अच्छा है, लेकिन वह पूरी तरह प्रभावशाली नहीं बन पाता। सबसे बड़ी कमी यह है कि रावण को छोड़कर बाकी किरदारों को दर्शकों के साथ भावनात्मक रिश्ता बनाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता। रणबीर और साई पल्लवी के बीच केमिस्ट्री की कमी भी खलती है।

ये भी पढ़ें: तुषार कपूर से मांगे 5 करोड़ रुपये, बिश्नोई गैंग के नाम पर मिली धमकी; हैरी बॉक्सर को लेकर हुआ बड़ा खुलासा

देखें या नहीं? जानिए किसके लिए है यह फिल्म

अगर आप बड़े पर्दे पर शानदार वीएफएक्स, विशाल सेट, युद्ध के दृश्य और आधुनिक तकनीक से तैयार की गई रामायण देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी। फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं, जो थिएटर में देखने लायक हैं। इसकी भव्यता और एक्शन दर्शकों को बांधे रखते हैं। हालांकि, कहानी के कुछ हिस्सों में भावनात्मक गहराई की कमी महसूस हो सकती है।

इमोशनल रामायण की तलाश है तो

अगर आप रामायण में राम और सीता के रिश्ते, परिवार के भावनात्मक प्रसंगों, त्याग, मर्यादा और किरदारों की गहराई को अधिक महत्व देते हैं, तो यह फिल्म आपकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर सकती। इस मामले में रामानंद सागर की लोकप्रिय टीवी रामायण आज भी दर्शकों के दिलों में अपनी अलग जगह रखती है।

ये भी पढ़ें: ‘ढिंढोरा’ से ‘अक्का’ तक, इस हफ्ते OTT पर आएंगी 6 फिल्में और सीरीज

अंतिम राय

कुल मिलाकर ‘रामायण पार्ट 1’ एक ऐसी फिल्म है, जिसमें तकनीक और भव्यता का शानदार प्रदर्शन देखने को मिलता है, लेकिन भावनात्मक स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण कमियां रह जाती हैं। यश का रावण, अरुण गोविल का दशरथ और जटायु से जुड़े दृश्य फिल्म की बड़ी ताकत हैं। वहीं, रणबीर कपूर के राम और साई पल्लवी की सीता के किरदार को और बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता था।

निर्माता नमित मल्होत्रा ने दुनिया को भारतीय सिनेमा की तकनीकी क्षमता दिखाने में काफी हद तक सफलता हासिल की है, लेकिन रामायण जैसी कहानी को यादगार बनाने के लिए सिर्फ शानदार वीएफएक्स नहीं, बल्कि दिल से जुड़ने वाले इमोशंस भी जरूरी हैं। कहानी पहले से सभी को पता है, फिर भी रामायण को बार-बार देखने की इच्छा ही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। यही वजह है कि इस फिल्म से दर्शकों की उम्मीदें इतनी ज्यादा हैं और इसके दूसरे भाग से भावनात्मक कमियों को पूरा करने की उम्मीद भी बनी हुई है।

Share: