मुरादाबाद में ढेला नदी ने मचाई तबाही: सड़कें डूबीं, दर्जनों गांवों का संपर्क टूटा; फसलें जलमग्न

Moradabad Flood: मुरादाबाद में पहाड़ों की भारी बारिश के बाद ढेला नदी उफान पर है। खादर क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात हैं, सड़कें और खेत जलमग्न होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।


August 21, 2026 by

Moradabad Flood News: मुरादाबाद में पहाड़ों पर हुई मूसलाधार बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में दिखाई देने लगा है। भोजपुर थाना क्षेत्र के खादर इलाके से होकर गुजरने वाली ढेला नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद आसपास के गांवों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। नदी का पानी कई जगह खेतों और संपर्क मार्गों तक पहुंच गया है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले 24 घंटे में जिले में 122 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।

सड़कें बनीं जलमग्न

ढेला नदी का पानी बढ़ने के कारण कई रास्तों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। कुछ स्थानों पर सड़कें पूरी तरह पानी में डूब गई हैं, जबकि गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों पर भी पानी बह रहा है। ग्रामीणों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने लोगों में आने वाले दिनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

एक दर्जन से अधिक गांव प्रभावित

बाढ़ जैसे हालात का सबसे ज्यादा असर खादर क्षेत्र के गांवों में दिखाई दे रहा है। आदमपुर, रुस्तमपुर, तिगरी, लालूवाला, इस्लाम नगर, खइय्या खादर और सिहाली शाहपुर समेत कई गांव प्रभावित हुए हैं। पानी बढ़ने से इन गांवों का संपर्क आसपास के इलाकों से कमजोर हो गया है। ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने और आवागमन का संकट खड़ा हो गया है।

खेतों में घुसा नदी का पानी

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ढेला नदी के बढ़े जलस्तर का सीधा असर किसानों पर भी पड़ा है। नदी के आसपास स्थित खेतों में पानी भर जाने से खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं। किसानों को फसलों के खराब होने और आर्थिक नुकसान की आशंका सताने लगी है। यदि पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहा तो फसल उत्पादन पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

दमदमा पुलिया पर बढ़ा पानी

काफियाबाद के पास दमदमा की पुलिया पर भी पानी का दबाव बढ़ गया है। जलस्तर बढ़ने के कारण शाहपुर से इस्लाम नगर होते हुए मुरादाबाद जाने वाला प्रमुख मार्ग बाधित हो गया है। इस रास्ते से आने-जाने वाले ग्रामीणों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। मार्ग बंद होने से स्थानीय लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।

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मवेशियों के चारे का संकट

बाढ़ के पानी ने सिर्फ आवागमन ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों को भी प्रभावित किया है। घरों के आसपास पानी भरने के कारण लोगों को जरूरी सामान जुटाने में दिक्कत हो रही है। वहीं, पशुपालकों के सामने मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध कराने की चुनौती खड़ी हो गई है। खेतों और रास्तों में पानी भरने से चारा लाने-ले जाने में भी परेशानी हो रही है।

ग्रामीणों ने मांगी तत्काल मदद

बिगड़ते हालात के बीच ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि नदी का जलस्तर अगर इसी गति से बढ़ता रहा तो प्रभावित गांवों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने जलभराव वाले रास्तों पर निगरानी बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने की मांग की है।

प्रशासन की नजर नदियों पर

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जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जिले में पांच प्रमुख नदियों के जलस्तर की निगरानी की जा रही है। अधिकारियों की नजर विशेष रूप से उन इलाकों पर है जहां जलस्तर बढ़ने के कारण गांवों और संपर्क मार्गों पर पानी पहुंचने की आशंका है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया है।

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गंगा अभी खतरे के निशान से नीचे

प्रशासन की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में गंगा का जलस्तर फिलहाल 189.8 मीटर दर्ज किया गया है। गंगा के लिए खतरे का निशान 190.6 मीटर निर्धारित है। यानी मौजूदा जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है। हालांकि, लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले पानी को देखते हुए नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

हर बढ़ते घंटे के साथ बढ़ रही चिंता

फिलहाल खादर क्षेत्र में सबसे बड़ी चिंता ढेला नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को लेकर है। खेतों, संपर्क मार्गों और पुलिया पर पानी पहुंचने के बाद ग्रामीणों को अब स्थिति सामान्य होने का इंतजार है। प्रशासन की निगरानी के बीच ग्रामीणों की नजर बारिश और नदी के जलस्तर पर बनी हुई है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो प्रभावित इलाकों में जलभराव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

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