बसपा में टिकट चाहिए? पहले दिखानी होगी ताकत, मायावती ने बनाया नया फॉर्मूला!

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बसपा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 9 अक्टूबर को लखनऊ में होने वाली कांशीराम परिनिर्वाण दिवस महारैली में 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया जा रहा है।


July 24, 2026 by

UP Politics News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। पार्टी संस्थापक कांशीराम के 9 अक्टूबर को होने वाले परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ स्थित कांशीराम स्मारक स्थल पर विशाल महारैली आयोजित की जाएगी।

इस रैली को केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की ताकत दिखाने के बड़े मंच के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इस रैली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि पार्टी ने इसमें रिकॉर्ड भीड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है।

टिकट के दावेदारों की होगी परीक्षा

बसपा की रणनीति के अनुसार आगामी विधानसभा चुनाव के संभावित उम्मीदवारों को अपने-अपने क्षेत्रों से अधिक से अधिक समर्थकों को रैली में लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी के भीतर यह संदेश साफ है कि जो नेता अपने क्षेत्र से सबसे अधिक भीड़ जुटाने में सफल होंगे, उनकी दावेदारी मजबूत मानी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि कई सीटों पर टिकट वितरण के दौरान रैली में जुटाई गई भीड़ भी एक महत्वपूर्ण मानक बन सकती है। ऐसे में टिकट की उम्मीद लगाए बैठे नेता इस महारैली को अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का बड़ा अवसर मान रहे हैं।

अगले सप्ताह होगी अहम बैठक

अगले सप्ताह होगी अहम बैठक

रैली की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए अगले सप्ताह प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में बसपा प्रमुख मायावती (Mayawati) स्वयं संगठन के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देंगी। बैठक में रैली की व्यवस्थाओं, भीड़ जुटाने की रणनीति, जिलावार जिम्मेदारियों और संगठनात्मक तैयारियों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। पार्टी चाहती है कि कार्यक्रम पूरी तरह व्यवस्थित और प्रभावशाली तरीके से संपन्न हो, ताकि चुनाव से पहले मजबूत राजनीतिक संदेश दिया जा सके।

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पिछली रैली से मिला था संगठन को उत्साह

बसपा नेताओं का कहना है कि पिछले वर्ष 9 अक्टूबर को आयोजित परिनिर्वाण दिवस की रैली में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भागीदारी देखने को मिली थी। उसी मंच से मायावती (Mayawati) ने यह घोषणा की थी कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव किसी भी दल के साथ गठबंधन किए बिना अकेले दम पर लड़ेगी। इस घोषणा के बाद संगठन के भीतर नए उत्साह का माहौल बना था और कार्यकर्ताओं में चुनावी तैयारियों को लेकर जोश बढ़ा था।

10 लाख से अधिक भीड़ का दावा

इस बार बसपा ने दावा किया है कि रैली में 10 लाख से अधिक लोगों की भागीदारी हो सकती है। पार्टी के अनुसार उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के अलावा अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक लखनऊ पहुंचेंगे। संगठन का मानना है कि यदि रैली में अपेक्षा के अनुरूप भीड़ जुटती है तो यह विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की राजनीतिक ताकत का बड़ा प्रदर्शन होगा और इससे बसपा के पक्ष में सकारात्मक माहौल बनाने में मदद मिलेगी।

यूपी की राजनीति (UP Politics) में मायावती का चुनावी संदेश रहेगा अहम

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस महारैली में मायावती (Mayawati) कार्यकर्ताओं को चुनावी रणनीति, संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक सक्रिय रहने का संदेश दे सकती हैं। इसके साथ ही वह आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की प्राथमिकताओं और रणनीति पर भी विस्तार से अपनी बात रख सकती हैं। ऐसे में 9 अक्टूबर की यह रैली बसपा के लिए केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव 2027 की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण राजनीतिक आयोजन साबित हो सकती है।

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