लोकसभा में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े अखिलेश यादव, ओम बिरला से पूछा- समझौता कर लिया आपने क्या?

Akhilesh Yadav News: लोकसभा के मानसून सत्र में NEET विवाद को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से "समझौता कर लिया आपने क्या?" कहकर नाराजगी जताई और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए सरकार पर छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल उठाए।


July 23, 2026 by

Akhilesh Yadav News Today: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवाद और छात्रों के भविष्य को लेकर संसद के मानसून सत्र में एक बार फिर जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने सरकार को घेरते हुए परीक्षा में कथित अनियमितताओं, छात्रों के आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।

इस दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने लोकसभा में तीखा रुख अपनाते हुए सरकार के साथ-साथ सदन की कार्यवाही पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि जब सरकार स्वयं परीक्षा दोबारा कराने का फैसला कर चुकी है तो यह स्वीकारोक्ति है कि परीक्षा प्रक्रिया में कहीं न कहीं गंभीर गड़बड़ी हुई है।

स्पीकर से सीधे पूछ लिया बड़ा सवाल

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष लगातार NEET पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा था। इसी बीच अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले कांग्रेस सांसद एवं महासचिव केसी वेणुगोपाल को अपनी बात रखने का अवसर दिया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखा।

जब अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को बोलने का मौका मिला तो उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अब वह क्या बोलें, क्योंकि पहले ही दूसरे नेताओं को बोलने का पर्याप्त अवसर दिया जा चुका है। इसी दौरान उन्होंने अध्यक्ष ओम बिरला की ओर देखते हुए कहा, “समझौता कर लिया आपने क्या?” उनके इस बयान के बाद सदन का माहौल और अधिक गरमा गया तथा विपक्षी सांसदों ने भी अपनी नाराजगी दर्ज कराई।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav)

संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की मांग बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और उसके बाद ही इस पूरे मामले पर आगे की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा परीक्षा दोबारा आयोजित कराने का फैसला यह साबित करता है कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर खामियां थीं। ऐसे में केवल जांच की घोषणा कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं करता।

केसी वेणुगोपाल से विवाद की खबरों पर दी सफाई

संसद में हुई कार्यवाही के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई कि अखिलेश यादव और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई थी। जब पत्रकारों ने इस संबंध में सवाल किया तो अखिलेश यादव ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी थी और विपक्षी दलों के बीच फ्लोर को-ऑर्डिनेशन पहले की तरह सामान्य हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष का साझा उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा करना और सरकार से जवाबदेही तय कराना है, इसलिए आपसी मतभेद जैसी कोई बात नहीं है।

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विपक्ष ने छात्रों के मुद्दे को बताया सबसे अहम

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा कि विपक्ष लगातार पहले दिन से छात्रों की आवाज संसद में उठा रहा है। उनका कहना था कि NEET विवाद केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि देश के लाखों युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती तो छात्रों को आंदोलन करने और दोबारा परीक्षा देने जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि विपक्ष आगे भी इस मुद्दे को पूरी मजबूती से उठाता रहेगा और छात्रों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की मांग करता रहेगा।

संसद में लगातार जारी है राजनीतिक टकराव

मानसून सत्र के दौरान NEET विवाद विपक्ष और सरकार के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी।

फिलहाल संसद में इस मुद्दे को लेकर गतिरोध बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार विपक्ष की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर संसद में आगे किस तरह की चर्चा होती है।

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