संभल में गंगा उफान पर, खतरे के निशान के करीब पहुंची नदी, लोगों को सतर्क रहने की सलाह

Sambhal News: संभल में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से सिर्फ 91 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। लगातार बारिश और हरिद्वार से छोड़े गए पानी के बाद प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया है।


July 29, 2026 by

Sambhal News Today: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में लगातार हो रही बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से छोड़े गए पानी के कारण गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गुन्नौर तहसील से लेकर गंगा किनारे बसे गांवों तक बाढ़ की आशंका गहराने लगी है। हालांकि फिलहाल गंगा खतरे के निशान से 91 सेंटीमीटर नीचे बह रही है, लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने प्रशासन, किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग पूरी तरह सतर्क हो गए हैं तथा संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

नरौरा गंगा बैराज पर तेजी से बढ़ा जलस्तर

बुधवार शाम छह बजे तक नरौरा स्थित चौधरी चरण सिंह गंगा बैराज पर गंगा का जलस्तर 177.85 मीटर दर्ज किया गया। जबकि यहां खतरे का निशान 178.765 मीटर निर्धारित है। बैराज क्षेत्र में 15 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। जलस्तर बढ़ने के बाद बैराज से लगभग 99,984 क्यूसेक पानी की निकासी की गई, जिससे डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में भी लगातार निगरानी रखी जा रही है।

हरिद्वार से छोड़ा गया पानी बना बढ़ते जलस्तर की वजह

सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार हरिद्वार क्षेत्र से छोड़े गए अतिरिक्त पानी का असर अब संभल तक दिखाई देने लगा है। विभाग के एसडीओ अंकित सिंह ने बताया कि जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है और इसी कारण गंगा किनारे बसे क्षेत्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। विभाग की टीमें हर घंटे जलस्तर की निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

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बाढ़ चौकियों को किया गया अलर्ट

बाढ़ चौकियों को किया गया अलर्ट

गुन्नौर के एसडीएम अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। प्रशासन ने राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील गांवों में लगातार सूचना एकत्र की जा रही है और ग्रामीणों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

तटबंधों पर चौबीस घंटे निगरानी

नरौरा बैराज के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में फिलहाल जलस्तर खतरे के निशान से नीचे बना हुआ है, लेकिन सिंचाई विभाग किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरत रहा। विभाग की टीमें मुख्य तटबंधों, बैराज और संवेदनशील स्थानों पर चौबीस घंटे निगरानी कर रही हैं। इंजीनियरों और कर्मचारियों को लगातार गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार के रिसाव या कटान की स्थिति का समय रहते समाधान किया जा सके।

खादर क्षेत्र के किसानों की बढ़ी चिंता

खादर क्षेत्र के किसानों की बढ़ी चिंता

गंगा का बढ़ता जलस्तर सबसे अधिक चिंता खादर क्षेत्र के किसानों के लिए लेकर आया है। इन इलाकों में धान, मक्का, बाजरा और अन्य फसलें तैयार हो रही हैं। यदि अगले कुछ दिनों में जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो निचले इलाकों की खेती जलमग्न हो सकती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने शुरू की एहतियाती तैयारियां

गंगा किनारे बसे कई गांवों के लोगों ने संभावित बाढ़ को देखते हुए पहले से तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई परिवार जरूरी सामान, अनाज और घरेलू वस्तुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। पशुपालकों ने भी अपने मवेशियों को ऊंचे स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था शुरू कर दी है ताकि जलभराव की स्थिति में नुकसान से बचा जा सके।

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प्रशासन ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील

जिला प्रशासन ने गंगा किनारे रहने वाले लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल प्रशासन द्वारा जारी सूचनाओं का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन मौसम और जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि गंगा का जलस्तर और बढ़ता है तो प्रभावित गांवों के लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

मौसम और जलस्तर पर लगातार नजर

मौसम विभाग के अनुसार पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में अभी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में गंगा के जलस्तर में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि प्रशासन, सिंचाई विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं और हर परिस्थिति से निपटने के लिए लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

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