संभल का सनसनीखेज कांड: कागजों में बहन को दिखाया ‘पत्नी’, इंश्योरेंस फ्रॉड में बेनकाब हुआ सिंडिकेट

Sambhal News: मृत चचेरी भाभी के नाम पर फर्जी आधार कार्ड बनाकर 2 लाख रुपये का बीमा क्लेम लेने की साजिश का पुलिस ने खुलासा किया है। भाई-बहन समेत तीन आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, जबकि गिरोह का सरगना फरार है।


August 7, 2026 by

Sambhal News In Hindi: प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत दो लाख रुपये का फर्जी बीमा क्लेम लेने की कोशिश का संभल पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। इस मामले में भाई-बहन और एक गवाह को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड अभी भी फरार है। जांच में सामने आया है कि मृत महिला के नाम पर फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया गया, बैंक खाता खुलवाया गया और बीमा क्लेम हासिल करने की पूरी साजिश रची गई। पुलिस को आशंका है कि यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है।

तीन गिरफ्तार, सरगना की तलाश जारी

पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि रजपुरा पुलिस ने धनारी थाना क्षेत्र के गांव कल्हा निवासी मोहित कुमार, उसकी सगी बहन शालू और बीमा क्लेम प्रपत्र पर गवाह बने तेजपाल को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इस पूरे गिरोह का कथित सरगना सत्यप्रकाश अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

मृत महिला के नाम पर खुलवाया बैंक खाता

पुलिस जांच के अनुसार, मोहित कुमार ने आठ नवंबर 2023 को अपनी मृत चचेरी भाभी राजकुमारी के नाम पर फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया। इसी आधार पर रजपुरा थाना क्षेत्र के केसरपुर स्थित सर्व यूपी प्रथमा ग्रामीण बैंक में नया बैंक खाता खुलवाया गया। इसके बाद सरकारी बीमा योजना के तहत दो लाख रुपये का क्लेम दाखिल करने की पूरी प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

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बहन बनी मृत महिला, भाई बना पति

पूरे फर्जीवाड़े में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मोहित कुमार ने खुद को मृतका राजकुमारी का पति सुमित कुमार बताकर प्रस्तुत किया। वहीं उसकी सगी बहन शालू को राजकुमारी बनाकर बैंक और बीमा दस्तावेजों में पत्नी के रूप में पेश किया गया। दोनों ने मिलकर पहचान छिपाने और सरकारी योजना का लाभ उठाने की कोशिश की।

बैंक सत्यापन ने खोली साजिश की पोल

जब बैंक शाखा प्रबंधक राहुल अग्रवाल ने बीमा क्लेम से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कराया तो पूरा मामला संदिग्ध नजर आया। जांच में पता चला कि राजकुमारी की मृत्यु 18 दिसंबर 2021 को हो चुकी थी और 24 फरवरी 2022 को ग्राम पंचायत द्वारा उसका विधिवत मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी किया जा चुका था। इसके बावजूद दूसरा फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर बीमा राशि का दावा किया गया।

आधार कार्ड में सिर्फ फोटो बदलने का खेल

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने आधार कार्ड में नाम, पता और अधिकांश विवरण पहले जैसे ही रहने दिए। केवल फोटो बदलकर पहचान का दुरुपयोग किया गया। मृतका राजकुमारी के आधार कार्ड में उसकी जगह शालू की तस्वीर लगा दी गई, जबकि उसके पति सुमित कुमार के आधार कार्ड में मोहित कुमार का फोटो लगा दिया गया। इसी बदलाव के सहारे बैंक और बीमा दस्तावेजों में धोखाधड़ी करने का प्रयास किया गया।

सरगना के ठिकाने से मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

जांच के दौरान पुलिस ने फरार आरोपी सत्यप्रकाश के ठिकाने पर छापेमारी की। वहां से आधार संशोधन में इस्तेमाल होने वाली मशीन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क के जरिए कितने लोगों के दस्तावेजों में फर्जी बदलाव किए गए।

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बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

पुलिस अब बैंक खातों, केवाईसी रिकॉर्ड, बीमा आवेदन पत्र, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और दस्तावेज तैयार करने वालों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं किसी बैंक कर्मचारी या बीमा एजेंट की मिलीभगत से तो यह पूरा फर्जीवाड़ा नहीं किया गया। यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पूरे जिले के बीमा क्लेम की होगी जांच

इस मामले के खुलासे के बाद पुलिस अधीक्षक ने सीओ गुन्नौर अंकित मिश्रा को निर्देश दिए हैं कि जिलेभर में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत किए गए सभी भुगतान और क्लेम का सत्यापन कराया जाए। सभी बैंक शाखाओं से रिकॉर्ड मांगे जाएंगे और लाभार्थियों, केवाईसी दस्तावेजों तथा भुगतान का मिलान किया जाएगा ताकि किसी अन्य फर्जी क्लेम का भी खुलासा हो सके।

पुराने बीमा फर्जीवाड़े से भी जुड़े तार

पुलिस का कहना है कि पिछले वर्ष भी इसी तरह का एक बड़ा बीमा फर्जीवाड़ा सामने आया था, जिसमें लोगों की उम्र करीब 20 वर्ष कम दिखाकर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में पंजीकरण कराया गया था। जांच के दौरान राजस्थान से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराने का मामला भी सामने आया था। इस बार गिरोह ने नई चाल चलते हुए मृत महिला के नाम पर दूसरा मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर बीमा क्लेम लेने की कोशिश की।

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आधार सेवा केंद्रों की भी होगी पड़ताल

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी आधार कार्ड किसी अधिकृत आधार सेवा केंद्र पर तैयार किए गए या फिर किसी अधिकृत ऑपरेटर की आईडी का दुरुपयोग कर घर बैठे संशोधन किया गया। फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब तक की जांच में अलीगढ़ नगर निगम की कोई भूमिका सामने नहीं आई है। हालांकि जांच लगातार जारी है और हर तकनीकी पहलू की पड़ताल की जा रही है।

पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की तैयारी

पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल दो लाख रुपये के फर्जी बीमा क्लेम तक सीमित नहीं हो सकता। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच के बाद यह पता लगाया जाएगा कि क्या इसी तरीके से अन्य बीमा कंपनियों में भी फर्जी पॉलिसियां और क्लेम किए गए हैं। यदि ऐसा पाया गया तो पूरे नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की जाएगी और इसमें शामिल हर आरोपी को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

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