Moradabad Monkey Attack: मुरादाबाद के कुंदरकी थाना क्षेत्र के शेखुपुर खास गांव में बंदरों के आतंक ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। रविवार सुबह करीब 10 बजे 58 वर्षीय सायरा बेगम अपने पति कल्लन के लिए चाय बनाने के लिए घर की छत पर बनी रसोई में गई थीं। बताया जा रहा है कि इसी दौरान अचानक बंदरों का एक बड़ा झुंड उनकी ओर दौड़ पड़ा। बंदरों को तेजी से अपनी तरफ आता देखकर सायरा बेगम घबरा गईं और खुद को बचाने के लिए पीछे हटने लगीं।
जान बचाने की कोशिश बनी आखिरी पल
बंदरों से बचने के दौरान सायरा बेगम का संतुलन बिगड़ गया। वह छत से करीब 12 फीट नीचे आंगन में जा गिरीं। गिरने के बाद उन्हें गंभीर चोटें आईं और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना इतनी अचानक हुई कि परिवार और आसपास मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। हादसे की जानकारी मिलते ही घर में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
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पति के लिए चाय बनाने निकली थीं सायरा

मृतका की पहचान 58 वर्षीय सायरा बेगम के रूप में हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक, वह रोजमर्रा की तरह रविवार सुबह भी अपने पति के लिए चाय बनाने छत पर गई थीं। परिवार को उम्मीद थी कि कुछ ही देर में वह चाय लेकर नीचे लौट आएंगी, लेकिन बंदरों के झुंड के कारण हुए हादसे ने सब कुछ बदल दिया। सायरा की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और गांव में भी शोक का माहौल बन गया।
गांव में बंदरों का भारी आतंक
हादसे के बाद ग्रामीणों में बंदरों के आतंक को लेकर गुस्सा और बढ़ गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि शेखुपुर खास गांव में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि गांव और आसपास के इलाकों में करीब 2 से 3 हजार बंदर घूमते हैं। इनके कारण लोगों को घरों की छतों पर जाने में भी डर लगने लगा है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष रूप से खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि बंदरों के हमले और उनसे जुड़े हादसों की घटनाएं लंबे समय से सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अब तक बंदरों के आतंक से जुड़े हादसों में करीब छह लोगों की जान जा चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बावजूद समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। रविवार को सायरा बेगम की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया।
वन विभाग से कई बार गुहार लगाने का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके आतंक को लेकर वन विभाग तथा स्थानीय प्रशासन को कई बार लिखित शिकायत दी जा चुकी है। लोगों के मुताबिक, हर बार समस्या का समाधान कराने का भरोसा दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं दिखाई दी। ग्रामीणों का आरोप है कि बंदरों को पकड़ने के लिए कोई बड़ा या स्थायी अभियान अब तक नहीं चलाया गया है।
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हादसे के बाद ग्रामीणों का प्रदर्शन
सायरा बेगम की मौत के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की। लोगों ने कहा कि अगर समय रहते बंदरों की समस्या पर प्रभावी कार्रवाई की जाती तो शायद ऐसे हादसों को रोका जा सकता था। ग्रामीणों ने गांव में बंदरों को पकड़ने के लिए तत्काल अभियान चलाने और प्रभावित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि शेखुपुर खास गांव में बंदरों की समस्या का स्थायी समाधान कराया जाए। लोगों का कहना है कि आए दिन बंदरों के कारण डर का माहौल बना रहता है और अब एक महिला की जान भी चली गई है। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से जल्द अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटना दोबारा न हो।

Tannu Chauhan एक अनुभवी डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार लेखन का लगभग 3 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने Royal Bulletin और Moradabad Live News में डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में वह UP News 24 के लिए विभिन्न विषयों पर तथ्यात्मक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित समाचार एवं डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं।












