आजम खान पर ED का शिकंजा, पुलिस-प्रशासन से मांगी 84 मुकदमों की फाइल, यूनिवर्सिटी भी जांच के घेरे में

Azam Khan News: आजम खान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आयकर विभाग के बाद अब ED ने उनके खिलाफ दर्ज 84 मुकदमों का पूरा रिकॉर्ड पुलिस-प्रशासन से मांगा है।


August 1, 2026 by

Azam Khan News In Hindi: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। ईडी ने रामपुर पुलिस और प्रशासन से आजम खान के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मुकदमों का विस्तृत रिकॉर्ड मांगा है। माना जा रहा है कि एजेंसी संभावित मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं की जांच को आगे बढ़ाने के लिए उनके पूरे आपराधिक इतिहास का अध्ययन कर रही है।

एफआईआर और चार्जशीट की प्रतियां तलब

एफआईआर और चार्जशीट की प्रतियां तलब

ईडी ने प्रशासन से स्पष्ट रूप से कहा है कि आजम खान के खिलाफ दर्ज प्रत्येक मुकदमे की एफआईआर की छायाप्रति उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही जिन मामलों में पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, उनकी सत्यापित प्रतियां भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार संबंधित दस्तावेज जल्द ही प्रवर्तन निदेशालय को उपलब्ध करा दिए जाएंगे ताकि जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

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84 मुकदमे, कई मामलों में फैसला

उपलब्ध जानकारी के अनुसार आजम खान के खिलाफ कुल 84 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से 16 मामलों में अदालत अपना फैसला सुना चुकी है। आठ मामलों में उन्हें सजा सुनाई जा चुकी है, जबकि आठ अन्य मामलों में अदालत से उन्हें राहत मिल चुकी है। शेष मामलों की सुनवाई विभिन्न अदालतों में जारी है। ईडी इन सभी मामलों का रिकॉर्ड जुटाकर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

जौहर यूनिवर्सिटी पर भी जांच का फोकस

जौहर यूनिवर्सिटी पर भी जांच का फोकस

ईडी की जांच का बड़ा केंद्र मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर विश्वविद्यालय भी बना हुआ है। विश्वविद्यालय के निर्माण पर लगभग 494 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया था, लेकिन ट्रस्ट अब तक इस खर्च का पूरा और संतोषजनक ब्योरा उपलब्ध नहीं करा सका है। इसी वजह से जांच एजेंसियों की नजर इस परियोजना पर लगातार बनी हुई है।

आयकर विभाग पहले ही कर चुका है कार्रवाई

हाल ही में आयकर विभाग ने जौहर ट्रस्ट का चैरिटेबल दर्जा समाप्त कर दिया था। विभाग ने ट्रस्ट से वर्ष 2015 से 2020 के बीच जमीन खरीद, भवन निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य विकास कार्यों पर खर्च हुई धनराशि का प्रमाण सहित पूरा रिकॉर्ड मांगा था। इसके अलावा करोड़ों रुपये का दान देने वाली 11 संदिग्ध फर्मों से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत करने को कहा गया था।

ट्रस्ट ने मांगा था अतिरिक्त समय

आयकर विभाग के नोटिस के जवाब में जौहर ट्रस्ट ने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी। हालांकि एजेंसियों का मानना है कि विश्वविद्यालय के निर्माण में बड़ी मात्रा में काले धन के इस्तेमाल की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि अब ईडी भी इस मामले की गहराई से जांच करने की तैयारी में जुट गई है।

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पहले भी पहुंच चुकी थी ईडी की टीम

यह पहली बार नहीं है जब जौहर विश्वविद्यालय जांच एजेंसियों के रडार पर आया हो। वर्ष 2022 में भी प्रवर्तन निदेशालय की टीम विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों की प्रारंभिक जांच के लिए रामपुर पहुंची थी। अब एक बार फिर एजेंसी ने पुराने रिकॉर्ड खंगालने के साथ-साथ नए दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जेल में बंद हैं आजम खान और अब्दुल्ला आजम

जेल में बंद हैं आजम खान और अब्दुल्ला आजम

फिलहाल आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम रामपुर जेल में बंद हैं। दोनों को अब्दुल्ला आजम के दो पैन कार्ड बनवाने और उनका उपयोग करने से जुड़े मामले में अदालत ने दोषी ठहराया था। इस मामले में सजा सुनाए जाने के बाद दोनों जेल में अपनी सजा काट रहे हैं।

जौहर यूनिवर्सिटी पर ध्वस्तीकरण की तलवार

हाल ही में रामपुर विकास प्राधिकरण ने जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए 38 भवनों को अवैध बताते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था। हालांकि मंडलायुक्त ने 27 जुलाई को इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को प्रस्तावित है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

आने वाले दिनों में बढ़ सकती है कानूनी चुनौती

ईडी द्वारा पुलिस और प्रशासन से रिकॉर्ड तलब किए जाने के बाद माना जा रहा है कि आजम खान और जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामलों में जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है। यदि दस्तावेजों की जांच में वित्तीय अनियमितताओं या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े ठोस साक्ष्य सामने आते हैं, तो प्रवर्तन निदेशालय आगे की कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर सकता है। आने वाले दिनों में यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति और कानूनी गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

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