Noida Crime News: रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का नोएडा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। नौकरी दिलाने के नाम पर अवैध कॉल सेंटर चलाने वाले इस गैंग के मास्टरमाइंड समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सामने आया कि आरोपी पिछले करीब डेढ़ साल से बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाकर उनसे अलग-अलग बहानों से पैसे वसूल रहे थे। शुरुआती जांच में पता चला है कि गिरोह अब तक 250 से अधिक लोगों को अपना शिकार बना चुका है।
संयुक्त कार्रवाई में दबोचा पूरा गिरोह
कोतवाली सेक्टर-20 पुलिस और साइबर टीम ने सोमवार रात अट्टा मार्केट स्थित एक कार्यालय पर छापा मारकर इस फर्जी जॉब रैकेट का भंडाफोड़ किया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मास्टरमाइंड श्वेता सिंह उर्फ प्रिया सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में नीजू यादव, कीर्ति सिंह उर्फ मीरा, पूजा, रूपेश कुमार और आमीर राणा शामिल हैं। पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
ये भी पढ़ें: प्रेमी के प्यार में हैवान बनी मां: रो रहे बेटे का दबा दिया गला, मथुरा से आई दिल दहला देने वाली सच्चाई
ऑनलाइन विज्ञापन से फंसाते थे बेरोजगार
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह नोएडा के सेक्टर-27 स्थित कार्यालय से अपना पूरा नेटवर्क संचालित करता था। आरोपी सबसे पहले जस्ट डायल जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नौकरी उपलब्ध कराने के आकर्षक विज्ञापन डालते थे। इसके अलावा नोएडा के प्रमुख मेट्रो स्टेशनों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पर्चे चिपकाकर और बांटकर बेरोजगार युवाओं तक अपनी पहुंच बनाते थे। विज्ञापनों में नामी कंपनियों में नौकरी दिलाने का दावा किया जाता था, जिससे नौकरी की तलाश कर रहे लोग आसानी से इनके जाल में फंस जाते थे।
इंटरव्यू और रजिस्ट्रेशन के नाम पर वसूली

विज्ञापन देखने के बाद संपर्क करने वाले अभ्यर्थियों को कॉल सेंटर बुलाया जाता था। यहां उन्हें भरोसा दिलाया जाता कि उनकी नौकरी प्रतिष्ठित कंपनियों में लगवा दी जाएगी। इसके बाद उनसे रजिस्ट्रेशन फीस, इंटरव्यू चार्ज, प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, मेडिकल जांच और यूनिफॉर्म के नाम पर अलग-अलग रकम जमा कराई जाती थी। उम्मीदवारों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि कुछ ही दिनों में उनका नियुक्ति पत्र जारी कर दिया जाएगा।
न नौकरी मिली, न वापस हुए पैसे
जब अभ्यर्थी निर्धारित समय के बाद नौकरी के बारे में जानकारी लेने पहुंचते थे तो उन्हें अलग-अलग बहाने बनाकर टाल दिया जाता था। कई लोगों को बार-बार नई तारीख दी जाती, जबकि कुछ के फोन तक उठाने बंद कर दिए जाते थे। आखिरकार पीड़ितों को समझ में आया कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। न उन्हें नौकरी मिली और न ही जमा कराई गई रकम वापस की गई।
शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद साइबर टीम ने मामले की जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और वादी की सूचना के आधार पर पुलिस ने कॉल सेंटर पर छापा मारा, जहां से पूरे फर्जी नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस का मानना है कि गिरोह सुनियोजित तरीके से लंबे समय से बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहा था।
ये भी पढ़ें: अब संभल जाइए! तेज रफ्तार और प्रेशर हॉर्न वालों पर मुरादाबाद पुलिस का बड़ा एक्शन
छापे में मिले अहम दस्तावेज
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से तीन मोबाइल फोन, 11 फीस बुक, चार रसीद बुक, 22 प्रचार-प्रसार के पंपलेट और 20 अभ्यर्थियों के भरे हुए आवेदन पत्र बरामद किए हैं। इन दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि गिरोह संगठित तरीके से नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से पैसे वसूलता था। बरामद मोबाइल फोन और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी।
डेढ़ साल से चल रहा था फर्जी ऑफिस
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों से ठगी की और वसूली गई रकम किन बैंक खातों में भेजी गई। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं।
एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि गिरफ्तार छह आरोपियों में चार महिलाएं शामिल हैं और सभी पिछले करीब डेढ़ साल से अवैध कॉल सेंटर चलाकर बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर ठगी कर रहे थे। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और उम्मीद है कि पूछताछ में कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।

Sunny Singh उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध और स्थानीय समाचारों को कवर करने वाले पत्रकार हैं। उन्हें डिजिटल पत्रकारिता और समाचार लेखन का लगभग 4 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने India Update 24 और Hind 24 में कार्य किया है। वर्तमान में वे UP News 24 की डिजिटल डेस्क पर कार्यरत हैं।






