राम वन गमन मार्ग पर CM योगी का एक्शन, PWD एक्सईएन सस्पेंड, SE पर भी गिरी गाज!

Lucknow News: राम वन गमन मार्ग की सड़कें क्षतिग्रस्त मिलने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख का असर दिखा है। शासन ने पीडब्ल्यूडी एक्सईएन रवींद्र पाल सिंह को सस्पेंड कर दिया।


September 13, 2026 by

CM Yogi Action: उत्तर प्रदेश में अयोध्या से चित्रकूट तक जाने वाले राम वन गमन मार्ग की खराब हालत और निर्माण कार्य में सामने आई खामियों के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी के बाद अब शासन ने कड़ा एक्शन लिया है। निरीक्षण के दौरान सड़क पर दरारें, क्षतिग्रस्त ढलान और सुरक्षात्मक कार्यों में कमियां सामने आने के बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। शासन ने प्रयागराज में तैनात अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) रवींद्र पाल सिंह को निलंबित कर दिया है। वहीं अधीक्षण अभियंता (एसई) ओंकार भारतीय के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

एक्सईएन पर गिरी निलंबन की गाज

शासन की ओर से शनिवार को जारी आदेश में अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह को निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग के कार्यालय से संबद्ध किया गया है। यह कार्रवाई राम वन गमन मार्ग परियोजना के पर्यवेक्षण में लापरवाही बरतने के आरोपों के बाद की गई है।

SE भी जांच के घेरे में

मामले में अधीक्षण अभियंता ओंकार भारतीय की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। शासन ने उन्हें परियोजना की पर्याप्त निगरानी नहीं करने के लिए जिम्मेदार माना है। उनके खिलाफ नियम-7 के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। जांच के लिए मुख्य अभियंता वाराणसी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। यानी अब परियोजना की निगरानी से लेकर सड़क की गुणवत्ता तक पूरे मामले की विभागीय जांच होगी।

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निरीक्षण में सामने आईं सड़क की खामियां

राम वन गमन मार्ग के ग्रीनफील्ड राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 731ए के पैकेज-2 के निरीक्षण के दौरान कई गंभीर कमियां सामने आई थीं। निरीक्षण टीम को सड़क के अलग-अलग हिस्सों में दरारें मिलीं। इसके अलावा सड़क की ढलान और हाईवे के किनारे किए गए सुरक्षात्मक कार्य भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त पाए गए। बारिश के दौरान सड़क की स्थिति खराब होने से परियोजना की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे।

1.5 किलोमीटर हिस्से में मिली परेशानी

जांच के दौरान हाईवे के किमी 35 से 49.15 के बीच, औतारपुर से सिंगरौर उपरहार तक के हिस्से का निरीक्षण किया गया। इसमें करीब 1.5 किलोमीटर के हिस्से में पेवमेंट के किनारे की पटरी में कुछ स्थानों पर दरारें मिलीं। वहीं करीब 500 मीटर लंबाई में हाईवे के किनारे बनाए गए सुरक्षात्मक कार्य भी क्षतिग्रस्त पाए गए। जांच टीम ने इन खामियों की पुष्टि की, जिसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

निगरानी में लापरवाही बनी वजह

शासन ने जांच में सामने आई कमियों के लिए अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता को उनके पर्यवेक्षणीय दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं करने के लिए जिम्मेदार माना। अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि परियोजना के निर्माण और गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाए और खामियां सामने आने पर समय रहते सुधार कराया जाए। लेकिन निरीक्षण में सड़क और सुरक्षात्मक कार्यों की स्थिति खराब मिलने के बाद शासन ने जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की।

निर्माण संस्था को भी नोटिस

मामले में केवल विभागीय अधिकारियों पर ही कार्रवाई नहीं हुई है। राम वन गमन मार्ग के निर्माण से जुड़ी संस्था के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। शासन की ओर से निर्माण संस्था को नोटिस जारी किया गया है। इसके जरिए निर्माण कार्य में सामने आई खामियों और सड़क के क्षतिग्रस्त होने को लेकर जवाब मांगा जाएगा। आगे की कार्रवाई जांच और संस्था के जवाब के आधार पर तय की जा सकती है।

पवन वर्मा की भी बढ़ीं मुश्किलें

इसी बीच लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता पवन वर्मा की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। यूपीडा में प्रतिनियुक्ति पर तैनात रहे पवन वर्मा की प्रतिनियुक्ति एक दिन पहले शासन ने समाप्त कर दी थी। इसके बाद उन्हें प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष कार्यालय से संबद्ध किया गया। अब एक अन्य मामले में उनके खिलाफ भी विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।

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पुराने मामले में विभागीय जांच

पवन वर्मा के खिलाफ कार्रवाई उनके यूपीडा में तैनाती से पहले के कार्यकाल से जुड़े मामले में की जा रही है। वह भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण में मुख्य अभियंता (यातायात) के पद पर तैनात रह चुके हैं। उनके प्रतिनियुक्ति कार्यकाल के दौरान बेयर बोट चार्टरिंग अनुबंध के क्रियान्वयन में वित्तीय अनियमितता सामने आने का आरोप है। इसी मामले में शासन ने अब विभागीय जांच शुरू करने का फैसला किया है।

चेक बाउंस मामले ने बढ़ाई परेशानी

मामले में बेयर बोट चार्टरिंग से जुड़ी एक फर्म की ओर से विभाग को पोस्ट डेटेड चेक दिए जाने की बात सामने आई थी। आरोप है कि यह चेक बाउंस हो गया, लेकिन इसके बावजूद समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। शासन ने इसे गंभीर अनियमितता माना है। इसी आधार पर पवन वर्मा के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी लोक नियामवली के नियम-7 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।

अब देना होगा आरोपों का जवाब

विभागीय कार्रवाई के तहत पवन वर्मा को आरोप पत्र जारी किया जाएगा। इसके बाद उन्हें अपने ऊपर लगाए गए आरोपों के संबंध में जवाब देना होगा। जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपों की पुष्टि और संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। इस तरह एक ही समय में लोक निर्माण विभाग से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में शासन की सख्ती देखने को मिल रही है।

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CM योगी के सख्त रुख का असर

राम वन गमन मार्ग की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी के बाद शासन स्तर पर तेजी से कार्रवाई हुई है। सरकार की ओर से साफ संकेत दिया गया है कि महत्वपूर्ण सड़कों और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं के निर्माण में लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अधिकारियों की निगरानी में कमी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी जवाबदेही तय होगी।

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