Moradabad Flood Alert News: मुरादाबाद में रामगंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी किनारे बसे ग्रामीण इलाकों में चिंता बढ़ गई है। नदी का पानी अब 190 मीटर का स्तर पार कर चुका है और खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। मंगलवार सुबह रामगंगा का जलस्तर 190.010 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 190.60 मीटर है। ऐसे में नदी का पानी खतरे के निशान से केवल 59 सेंटीमीटर नीचे रह गया है।
कुछ घंटों में बढ़ा पानी
कटघर रेलवे पुल पर सोमवार रात आठ बजे रामगंगा का जलस्तर 189.930 मीटर दर्ज किया गया था। मंगलवार सुबह दस बजे तक यह बढ़कर 190.010 मीटर पहुंच गया। हालांकि इसके बाद सुबह जलस्तर स्थिर दर्ज किया गया, लेकिन नदी के खतरे के निशान के इतने करीब पहुंचने से प्रशासन और ग्रामीण दोनों सतर्क हो गए हैं। जलस्तर में दोबारा तेजी आने की स्थिति में निचले इलाकों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
नदी किनारे गांवों पर नजर
रामगंगा के बढ़ते पानी का सबसे ज्यादा असर नदी किनारे बसे गांवों पर पड़ने की आशंका है। ठाकुरद्वारा क्षेत्र के सुल्तानपुर खादर, लालापुर पीपलसाना और रायभूड़ सहित कई गांवों में ग्रामीणों की चिंता बढ़ी हुई है। इन इलाकों में नदी का पानी बढ़ने के साथ ही खेतों और संपर्क मार्गों पर असर दिखाई देने लगा है।
धान की फसल पानी में
नदी के आसपास के कृषि क्षेत्रों में पहले से ही पानी पहुंचा हुआ है। खेतों में खड़ी धान की फसल प्रभावित होने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रामगंगा के जलस्तर में फिर तेजी आती है तो सबसे पहले कृषि भूमि प्रभावित होगी और उसके बाद पानी आबादी की ओर बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
रायभूड़ में आवागमन प्रभावित
रायभूड़ गांव में मुख्य सड़क तक पानी पहुंचने से आवागमन प्रभावित हुआ है। रास्तों पर पानी आने के कारण ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच ग्रामीणों की नजर अब रामगंगा के पानी पर टिकी हुई है और हर बढ़ोतरी उनके लिए नई चिंता पैदा कर रही है।
मूंढापांडे में प्रशासन की निगरानी
मूंढापांडे क्षेत्र में भी प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी है। रनियाठेर, अहरौला जगरमपुरा, रजेड़ा नदी पुल, भीतखेड़ा, हिरनखेड़ा और जैतपुर बिसाहट जैसे इलाकों में हालात पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति का जायजा ले रही हैं, ताकि पानी बढ़ने की स्थिति में समय रहते राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
DM ने कहा- रामगंगा-कोसी पर हाई अलर्ट
जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने बताया कि रामगंगा और कोसी नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। रामगंगा का पानी 189.6 मीटर के चेतावनी स्तर तक पहुंच गया है, हालांकि यह अभी 190.6 मीटर के खतरे के निशान से नीचे है। नदी के बढ़ते पानी से खेत जलमग्न हैं, लेकिन प्रशासन के अनुसार अगले 3-4 दिनों में पानी निकलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि गंगा का जलस्तर थोड़ा कम होते ही कोसी और रामगंगा का पानी भी धीरे-धीरे कम होने लगेगा। फिलहाल प्रशासन 24 घंटे हाई अलर्ट पर है और प्रभावित गांवों की लगातार निगरानी की जा रही है।
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नाव और मेडिकल टीम तैयार
बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए पीएसी की दो नावों को तैयार रखा गया है। इसके साथ ही मेडिकल टीम भी अलर्ट मोड पर है। प्रशासन जरूरत पड़ने पर प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए राहत एवं बचाव व्यवस्था को सक्रिय करने की तैयारी में है।
कांठ क्षेत्र में भी पानी फैला
कांठ क्षेत्र के सलेमपुर, राजीपुर खादर, रामसराय, पाइंदापुर और फजलाबाद के जंगलों में पानी फैलने से कई रास्ते प्रभावित हुए हैं। इन क्षेत्रों में नदी के पानी का फैलाव ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। जलस्तर में आगे वृद्धि होने पर संपर्क मार्गों के साथ-साथ आसपास के आवासीय क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
मकानों की चौखट तक पानी
सलेमपुर में रामगंगा का पानी कृषि भूमि से होते हुए मकानों की चौखट तक पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों में घरों के भीतर पानी घुसने की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीण लगातार नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं और पानी की स्थिति को देखते हुए किसी भी आपात परिस्थिति के लिए तैयार रहने की कोशिश कर रहे हैं।
बाढ़ चौकियां हाई अलर्ट पर
प्रशासन ने बाढ़ चौकी प्रभारियों को अलर्ट रहने और लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील इलाकों में पानी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जलस्तर या परिस्थितियों में किसी भी महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी तत्काल उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाए।
सीडब्ल्यूसी अलर्ट से बढ़ी चिंता
केंद्रीय जल आयोग की ओर से रामगंगा में सामान्य से अधिक बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पहले ही अलर्ट जारी किया गया था। सोमवार रात आठ बजे से मंगलवार सुबह नौ बजे तक निम्न तीव्रता का बाढ़ अलर्ट प्रभावी रहा। अब नदी का जलस्तर 190.010 मीटर तक पहुंचने के बाद खतरे के निशान के और करीब आ गया है, जिससे प्रशासन की सतर्कता और बढ़ गई है।
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जलस्तर पर टिकी निगाहें
फिलहाल रामगंगा का जलस्तर स्थिर बताया जा रहा है, लेकिन खतरे के निशान के बेहद करीब होने के कारण स्थिति को सामान्य नहीं माना जा रहा है। नदी के जलस्तर में आने वाले बदलाव पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। आने वाले घंटों में पानी बढ़ता है या स्थिर रहता है, इसी पर नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ के खतरे की गंभीरता काफी हद तक निर्भर करेगी।

Sunny Singh उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध और स्थानीय समाचारों को कवर करने वाले पत्रकार हैं। उन्हें डिजिटल पत्रकारिता और समाचार लेखन का लगभग 4 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने India Update 24 और Hind 24 में कार्य किया है। वर्तमान में वे UP News 24 की डिजिटल डेस्क पर कार्यरत हैं।












