यूपी के 80 गांव बाढ़ में डूबे: गंगा, यमुना और शारदा समेत 10 नदियां उफान पर, नाव से स्कूल जा रहे बच्चे

UP Flood News Today: उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना और शारदा समेत 10 नदियां उफान पर हैं। 80 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि कानपुर में बच्चे नाव से स्कूल जाने को मजबूर हैं।


August 13, 2026 by

UP Flood News Today: पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश का असर अब उत्तर प्रदेश में साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश में गंगा, यमुना और शारदा समेत करीब 10 प्रमुख नदियां उफान पर हैं। बढ़ते जलस्तर के चलते 80 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। कई इलाकों में ग्रामीणों के सामने आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई है। सबसे ज्यादा असर फर्रुखाबाद में देखने को मिल रहा है, जहां 49 गांव बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं।

काशी के घाटों पर संकट

Ganga water level rises in Varanasi

वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है। गंगा किनारे स्थित 100 से ज्यादा छोटे मंदिर भी पानी में डूब गए हैं। जलस्तर बढ़ने का सीधा असर अंतिम संस्कार पर भी पड़ा है। हरिश्चंद्र घाट का शवदाह स्थल पानी में डूब चुका है, जिसके बाद ऊपरी सीढ़ियों पर चिताएं जलाई जा रही हैं।

अंतिम संस्कार के लिए लंबा इंतजार

हरिश्चंद्र घाट पर जगह की कमी के कारण अंतिम संस्कार के लिए लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कई परिवारों को शवदाह के लिए 2 से 3 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। घाट पर सीमित स्थान बचने के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित हुई है और गंगा का बढ़ता पानी स्थानीय लोगों के लिए लगातार चिंता का विषय बना हुआ है।

कानपुर में नाव बनी सहारा

कानपुर में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गया है। नदी का पानी आसपास के निचले इलाकों में पहुंचने लगा है और पांच से ज्यादा गांवों में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। कई जगहों पर रास्ते पानी में डूबने के कारण बच्चों को नाव के जरिए स्कूल जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों की रोजमर्रा की आवाजाही भी नावों पर निर्भर हो गई है।

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फसलें पानी में डूबीं

Hundreds of bighas of agricultural land have been submerged in the flood-affected areas of Kanpur

कानपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सैकड़ों बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलों पर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक लगातार बढ़ते पानी के कारण खेती और आवागमन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। निचले इलाकों में रहने वाले परिवार भी बढ़ते जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।

उन्नाव की कॉलोनियों में पानी

उन्नाव में गंगा का पानी रिहायशी इलाकों और कॉलोनियों तक पहुंच गया है। कई स्थानों पर गलियों में पानी भरने के बाद नावों की मदद से लोगों को आवाजाही करनी पड़ रही है। कुछ परिवारों ने पानी से बचने के लिए घरों की छतों पर अपना ठिकाना बना लिया है। बाढ़ के कारण सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित दिखाई दे रहा है।

शारदा ने बढ़ाई मुश्किल

लखीमपुर-खीरी में शारदा नदी भी लगातार कटान और बढ़ते जलस्तर के कारण परेशानी बढ़ा रही है। नदी की धारा में अब तक करीब 70 एकड़ जमीन समा चुकी है। नदी के कटान से कृषि भूमि प्रभावित हुई है और ग्रामीण इलाकों में चिंता बढ़ गई है। प्रशासन और स्थानीय लोग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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रायबरेली में घर में घुसा सांप

रायबरेली में बाढ़ और बारिश के बीच एक घर में करीब 5 फीट लंबा सांप घुसने से हड़कंप मच गया। पानी बढ़ने के साथ जहरीले और जंगली जीवों के रिहायशी इलाकों में पहुंचने का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में ग्रामीणों को घरों और आसपास के जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

48 जिलों में बारिश का अलर्ट

Rain alert for 48 districts

मौसम विभाग ने आज उत्तर प्रदेश के 48 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। हालांकि प्रदेश के ज्यादातर शहरों में फिलहाल धूप निकली हुई है, लेकिन कई इलाकों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। नदियों का जलस्तर पहले से बढ़ा होने के कारण बारिश होने पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है।

फिर जोर पकड़ेगा मानसून

वाराणसी स्थित BHU के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक फिलहाल मानसूनी बादल उत्तर प्रदेश से कुछ हद तक छंट गए हैं। हालांकि बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय होने वाला है। इसके प्रभाव से प्रदेश में एक बार फिर मानसून जोर पकड़ सकता है।

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आने वाले दिनों में अच्छी बारिश

प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम के प्रभाव से उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर फिर शुरू हो सकता है। आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में पहले से बाढ़ की मार झेल रहे इलाकों में प्रशासन और ग्रामीणों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।

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