विदेशी हसीना के प्यार में पड़े भारतीय को लगा 68 लाख का चूना, दिल्ली में पकड़ा गया नाइजीरियाई गिरोह

Lucknow 68 Lakh Scam: लखनऊ में विदेशी नागरिकों की फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर 68 लाख रुपये की ठगी करने वाले नाइजीरियाई आरोपी को यूपी एसटीएफ ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है।


August 12, 2026 by

Nigerian Fraud Scam Lucknow: लखनऊ में सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवक को अपने जाल में फंसाकर करीब 68 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के एक नाइजीरियाई सदस्य को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी विदेशी नागरिकों के नाम पर फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल तैयार कर लोगों से दोस्ती करता था और उन्हें महंगे गिफ्ट, डॉलर व पाउंड भेजने का झांसा देकर लाखों रुपये ऐंठता था।

आरोपी की पहचान

Nigerian Fraud Scam Lucknow

गिरफ्तार आरोपी की पहचान नवोगु ओबेड ओसिनाची के रूप में हुई है। वह नाइजीरिया के इमो स्टेट का रहने वाला बताया गया है। एसटीएफ के मुताबिक, आरोपी काफी समय से पुलिस की पकड़ से बाहर था और दिल्ली में रहकर गिरोह की गतिविधियों में शामिल था।

सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल

एसटीएफ की जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिकों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाते थे। इन प्रोफाइल के जरिए भारतीय युवक-युवतियों को दोस्ती और बातचीत के जरिए अपने विश्वास में लिया जाता था।

दोस्ती से शुरू होता था जाल

गिरोह पहले सोशल मीडिया पर लोगों से बातचीत शुरू करता था। धीरे-धीरे दोस्ती को मजबूत करने के बाद विदेशी नागरिक होने का भरोसा दिलाया जाता था। इसके बाद पीड़ित को बताया जाता था कि उसके लिए विदेश से महंगा गिफ्ट, डॉलर या पाउंड भेजे जा रहे हैं।

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महंगे गिफ्ट का झांसा

कुछ समय बाद पीड़ित को फोन या मैसेज के जरिए बताया जाता था कि विदेश से भेजा गया पार्सल भारत के एयरपोर्ट पर पहुंच चुका है। इसके बाद कस्टम ड्यूटी, इनकम टैक्स, जीएसटी या अन्य शुल्क के नाम पर रकम जमा करने के लिए कहा जाता था।

अधिकारी बनकर वसूली

ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए गिरोह के सदस्य खुद को कस्टम अथवा इनकम टैक्स अधिकारी बताते थे। पीड़ित पर जल्द से जल्द रकम जमा करने का दबाव बनाया जाता था। अलग-अलग शुल्क के नाम पर बार-बार पैसे भेजवाकर ठगी की रकम बढ़ाई जाती थी।

लखनऊ के युवक को बनाया निशाना

एसटीएफ के अनुसार, लखनऊ के एक युवक को फेसबुक पर इंग्लैंड निवासी डोरिस विलियम के नाम से बनाए गए फर्जी प्रोफाइल के जरिए संपर्क किया गया था। बातचीत के बाद उसे प्रेमजाल में फंसाया गया और फिर विदेश से गिफ्ट व विदेशी मुद्रा भेजने का भरोसा दिलाया गया।

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68 लाख रुपये की ठगी

गिरोह ने युवक से कस्टम चार्ज, इनकम टैक्स, जीएसटी और अन्य शुल्क के नाम पर करीब 68 लाख रुपये की रकम वसूल ली। ठगों ने पीड़ित को भरोसा दिलाने के लिए यूनाइटेड किंगडम और इंग्लैंड के नाम से एक फर्जी आरबीएस सर्टिफिकेट भी भेजा था।

पुलिस तक पहुंचा मामला

Lucknow Crime Madiyaon Police Station

ठगी का एहसास होने के बाद इस मामले में लखनऊ के मड़ियांव थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके बाद एसटीएफ की साइबर टीम ने मामले की जांच शुरू की और डिजिटल गतिविधियों के साथ आरोपियों से जुड़े अन्य सुराग जुटाए।

पहले भी पकड़े जा चुके साथी

एसटीएफ की जांच में गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका भी सामने आई। गिरोह से जुड़े उचेनवा और ओबेस प्रोस्पर को पहले ही दिल्ली से गिरफ्तार किया जा चुका था। वहीं नवोगु ओबेड लगातार फरार चल रहा था और उसकी तलाश की जा रही थी।

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दिल्ली में छापेमारी

एसटीएफ को आरोपी के दिल्ली में मौजूद होने की सूचना मिली। इसके बाद टीम ने कमल बिहार, बुराड़ी स्थित उसके ठिकाने पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान नवोगु ओबेड ओसिनाची को गिरफ्तार कर लिया गया।

2022 में भारत आया था आरोपी

पूछताछ के दौरान आरोपी ने एसटीएफ को बताया कि वह वर्ष 2022 में बिजनेस वीजा पर भारत आया था। वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह दिल्ली में रह रहा था। इसी दौरान वह अपने साथियों के संपर्क में आया और सोशल मीडिया के जरिए साइबर ठगी करने के तरीके में शामिल हो गया।

गिरोह ने सिखाया ठगी का तरीका

आरोपी के अनुसार, उसके साथियों ने उसे अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिकों के नाम से फर्जी प्रोफाइल तैयार करने और भारतीय लोगों को विश्वास में लेकर ठगी करने के तरीके बताए। इसके बाद वह भी गिरोह की गतिविधियों में शामिल हो गया।

68 लाख की ठगी में भूमिका

पूछताछ में आरोपी ने लखनऊ के युवक से हुई करीब 68 लाख रुपये की ठगी में अपनी भूमिका स्वीकार की। उसके मुताबिक इस ठगी में वह अपने साथियों उचेनवा और प्रोस्पर के साथ शामिल था। एसटीएफ अब गिरोह की पूरी गतिविधियों और अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

कई राज्यों तक फैला नेटवर्क

जांच में एसटीएफ को यह भी जानकारी मिली है कि गिरोह ने केवल लखनऊ में ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में भी लोगों को इसी तरह अपने जाल में फंसाया। विदेशी प्रोफाइल, गिफ्ट और विदेशी मुद्रा का लालच देकर लोगों से रकम वसूली जाती थी।

बैंक खातों की जांच

एसटीएफ अब उन बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट की भी जांच कर रही है, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को हासिल करने के लिए किया गया। जांच का उद्देश्य गिरोह के आर्थिक नेटवर्क और पैसों के लेनदेन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करना है।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से खुलेगा राज

गिरफ्तार आरोपी से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। इन उपकरणों से सोशल मीडिया प्रोफाइल, चैट, संपर्क और वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।

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अन्य आरोपियों की तलाश

एसटीएफ की कार्रवाई के बाद अब गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी प्रोफाइल कौन तैयार करता था, पीड़ितों को कौन निशाना बनाता था और ठगी की रकम को अलग-अलग खातों या वॉलेट तक कौन पहुंचाता था।

कानूनी कार्रवाई

गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ थाना मड़ियांव, कमिश्नरेट लखनऊ में मु0अ0सं0 33/2026 दर्ज है। उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत कार्रवाई की गई है। मामले में आगे की जांच जारी है।

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