मुस्लिम महिलाओं ने उठाई कांवड़, मेरठ में हुआ भव्य स्वागत; बोलीं- हिंदू धर्म में नहीं कोई बंदिश!

Kanwar Yatra 2026: सावन में आस्था और सौहार्द की अनोखी तस्वीर सामने आई है। दिल्ली और संभल की मुस्लिम महिलाओं अनीसा बानो और तमन्ना मलिक ने मन्नत पूरी होने पर कांवड़ उठाई। मेरठ में उनका भव्य स्वागत हुआ।


August 8, 2026 by

Kanwar Yatra 2026 Meerut News: सावन के पवित्र महीने में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान जहां देशभर से शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं इस यात्रा में आपसी भाईचारे और धार्मिक सौहार्द की तस्वीरें भी सामने आ रही हैं। दिल्ली और संभल की रहने वाली दो मुस्लिम महिलाओं ने भी कांवड़ यात्रा में हिस्सा लेकर गंगाजल उठाया। दोनों महिलाओं का कहना है कि उन्होंने अपनी आस्था और मन्नत के चलते कांवड़ यात्रा शुरू की है।

मेरठ सीमा पर जोरदार स्वागत

दिल्ली-दून हाईवे से कांवड़ लेकर गुजर रहीं अनीसा बानो और तमन्ना मलिक जब दादरी बॉर्डर के रास्ते मेरठ की सीमा में पहुंचीं तो दौराला क्षेत्र में उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने दोनों महिला कांवड़ियों का सम्मान किया और उनकी यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। महिलाओं के स्वागत को लेकर आसपास के लोगों में भी उत्साह देखने को मिला।

सम्मान से अभिभूत महिलाएं

मेरठ की सीमा में प्रवेश करने के बाद सकौती स्थित युवा बजरंग दल के प्रांत अध्यक्ष आदेश चौधरी के कार्यालय पर दोनों महिलाओं का भव्य स्वागत किया गया। आदेश चौधरी ने अनीसा बानो और तमन्ना मलिक को भगवान राम परिवार और वीर हनुमान की प्रतिमाएं भेंट कीं। महिलाओं ने इस सम्मान के लिए आभार जताया और कहा कि पूरी यात्रा के दौरान उन्हें लोगों से अपनापन और सम्मान मिला है।

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मन्नत लेकर उठाई कांवड़

नई दिल्ली की रहने वाली अनीसा बानो और संभल निवासी तमन्ना मलिक ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत संघर्ष और अपनी मन्नत पूरी होने की इच्छा के चलते कांवड़ उठाई है। दोनों महिलाओं के लिए यह यात्रा सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि उनके जीवन से जुड़ी भावनाओं और विश्वास का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आस्था के रास्ते पर उन्हें लगातार लोगों का सहयोग और सम्मान मिल रहा है।

अनीसा का व्यक्तिगत संघर्ष

अनीसा बानो ने अपने जीवन से जुड़े संघर्ष का जिक्र करते हुए बताया कि उनके पति इरफान ने उन्हें तलाक दे दिया था। इसके बाद उन पर हलाला का दबाव बनाए जाने की बात भी उन्होंने कही। अनीसा के मुताबिक, जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके बच्चों अलीना और इसरान को उनके पति ने अपने पास रख लिया। अब बच्चों की सुपुर्दगी हासिल करने के लिए वह दिल्ली की अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।

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बच्चों के लिए मांगी मन्नत

अनीसा ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को वापस पाने के लिए मन्नत मांगी थी। इसी मन्नत के चलते उन्होंने कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra 2026) करने का फैसला लिया। हरिद्वार से गंगाजल लेकर वह गाजियाबाद स्थित यतींद्र नरसिंहा महाराज के आश्रम के शिवालय में पहुंचकर जलाभिषेक करेंगी। अनीसा का कहना है कि अब उन्हें भगवान भोलेनाथ से ही मदद की उम्मीद है और वह अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना कर रही हैं।

तमन्ना की भी अपनी आस्था

संभल की रहने वाली तमन्ना मलिक, जो अमन त्यागी की पत्नी हैं, ने भी अपनी कांवड़ यात्रा को लेकर अनुभव साझा किया। तमन्ना ने बताया कि उन्होंने एक मन्नत के साथ कांवड़ उठाई थी। उनके अनुसार, उनकी मनोकामना भगवान भोलेनाथ ने पूरी कर दी। इसी आस्था और विश्वास के चलते उन्होंने कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra 2026) करने का संकल्प लिया।

कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra 2026) के दौरान हर कदम पर मिला सम्मान

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तमन्ना मलिक ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी या भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। इसके उलट रास्ते में लोगों से उन्हें अपनापन और सम्मान मिला। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव ने उन्हें बेहद प्रभावित किया है। उनका कहना है कि हिंदू धर्म में किसी तरह की बंदिश और पाबंदी नहीं है और उन्हें यात्रा के दौरान लोगों का बहुत अच्छा व्यवहार देखने को मिला।

अनीसा ने इंसाफ को लेकर कही बात

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अनीसा बानो ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि उन्हें अपने जीवन में इंसाफ नहीं मिला और अब उन्हें भगवान भोलेनाथ से मदद की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म और यहां के लोगों के प्रति उनकी गहरी आस्था है। अनीसा के इस बयान के बाद कांवड़ यात्रा के दौरान धार्मिक सौहार्द और व्यक्तिगत आस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

पहले मुस्लिम युवक भी उठा चुका है कांवड़

इससे पहले मेरठ के मोहल्ला होली चौक, मंदवाड़ी रोड निवासी मंजूर के 22 वर्षीय बेटे शाकिर ने भी कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra 2026) में हिस्सा लिया था। बताया गया कि भगवान शिव के प्रति उसकी आस्था लंबे समय से बनी हुई है। शाकिर पिछले तीन वर्षों से नियमित रूप से भगवान शिव की आराधना कर रहा है और कांवड़ यात्रा के जरिए अपनी श्रद्धा प्रकट करता रहा है।

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इस बार 201 लीटर गंगाजल

शाकिर ने पिछले साल हरिद्वार से 101 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाई थी और उसे विभिन्न शिवालयों में चढ़ाया था। इस बार उसने अपनी कांवड़ में 201 लीटर गंगाजल लेकर यात्रा की है। उसकी यह यात्रा भी कांवड़ मेले में धार्मिक आस्था और आपसी सौहार्द की अलग तस्वीर पेश कर रही है।

आस्था बनी सौहार्द की मिसाल

अनीसा बानो, तमन्ना मलिक और शाकिर की कांवड़ यात्रा ने यह दिखाया है कि धार्मिक आस्था के अपने-अपने रूप हो सकते हैं। सावन की कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra 2026) में सामने आई ये तस्वीरें सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान का संदेश भी दे रही हैं। मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में इन कांवड़ियों के स्वागत ने यात्रा के दौरान भाईचारे की भावना को और मजबूत किया है।

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