UP Politics: यूपी में तीसरी बार योगी को CM नहीं बनने देंगे, ओवैसी के ऐलान से गरमाई सियासत

UP Politics: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वह योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनते नहीं देखना चाहते। उन्होंने बीजेपी को रोकने के लिए विपक्षी दलों से गठबंधन की इच्छा जताई।


October 26, 2026 • by

UP Politics News: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। शामली जिले के कैराना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार बनने से रोकने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। उन्होंने साफ कहा कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनते नहीं देखना चाहते। ओवैसी के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में विपक्षी दलों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।

विपक्षी दलों के साथ गठबंधन के लिए तैयार AIMIM

ओवैसी ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों को साथ आने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि अगर अन्य विपक्षी पार्टियों का मकसद भी उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार को सत्ता में आने से रोकना है, तो AIMIM उनके साथ गठबंधन करने के लिए तैयार है। ओवैसी के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक रणनीति स्पष्ट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

विपक्ष की चुप्पी पर ओवैसी ने उठाए सवाल

AIMIM प्रमुख ने बीजेपी के साथ-साथ विपक्षी दलों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टियां अल्पसंख्यकों और समाज के कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी तरीके से नहीं उठाती हैं। ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए मस्जिदों को तोड़े जाने और ‘हाफ एनकाउंटर’ की घटनाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर विपक्षी दल अपेक्षित आवाज नहीं उठा रहे हैं।

ओवैसी ने सवाल किया कि जब अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं, तो विपक्षी पार्टियां उनके समर्थन में खुलकर क्यों नहीं बोलतीं? उनके इस बयान का निशाना उन विपक्षी दलों पर भी था, जो उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक विकल्प बनने का दावा करते हैं।

अखिलेश यादव पर भी ओवैसी का हमला

अपने संबोधन के दौरान ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने बदायूं और फिरोजाबाद लोकसभा सीटों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पहले इन सीटों से मुस्लिम नेता सांसद बनते थे, लेकिन बाद में अखिलेश यादव के परिवार के सदस्य वहां से सांसद बने। ओवैसी ने इसे मुस्लिम समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी से जोड़ते हुए सवाल उठाए।

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उन्होंने कहा, “सांसद की पार्लियामेंटरी सीट से सलमान एमपी बनता था, वहां अखिलेश के भाई एमपी बन गए। फिरोजाबाद से मुसलमान एमपी बनता था, वहां अखिलेश के परिवार के लोग एमपी बन गए।” ओवैसी के इस बयान के जरिए समाजवादी पार्टी के नेतृत्व और मुस्लिम समाज की राजनीतिक भागीदारी को लेकर सवाल खड़े किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव और उनका परिवार मुस्लिम समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी पर अपना अधिकार समझता है।

परिवारवाद को लेकर तीखा कटाक्ष

ओवैसी ने अखिलेश यादव के परिवार पर तंज कसते हुए कहा कि क्या मुस्लिम समाज का काम सिर्फ उनके परिवार के सदस्यों को राजनीतिक सीटें देना रह गया है? उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “अखिलेश और उनका परिवार यह कह रहा है कि उनके परिवार में जितने बच्चे-बच्चियां पैदा होंगे, तो तुम्हारा काम यह है अब्दुल! तुम्हारी सालगिरह पर तुम केक नहीं काटना, सांसद और विधायक की सीट हमारे परिवार के बच्चे और बच्चियों को गिफ्ट में दे देना।”

इस टिप्पणी के जरिए ओवैसी ने समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद और मुस्लिम समाज को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं देने का आरोप लगाया। उनका बयान ऐसे समय में आया है, जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीति और संभावित गठबंधनों को लेकर सक्रिय हैं।

यूपी चुनाव से पहले विपक्षी एकजुटता पर नजरें

ओवैसी के बयान में दो प्रमुख राजनीतिक संदेश दिखाई देते हैं। पहला, AIMIM बीजेपी को उत्तर प्रदेश की सत्ता में लौटने से रोकने के लिए विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की संभावना खुली रखना चाहती है। दूसरा, पार्टी मुस्लिम समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी के मुद्दे को उठाकर समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों की रणनीति पर सवाल खड़े कर रही है।

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अब देखना होगा कि ओवैसी की गठबंधन की पेशकश पर दूसरे विपक्षी दल क्या रुख अपनाते हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में AIMIM किस तरह अपनी राजनीतिक रणनीति आगे बढ़ाती है। फिलहाल, कैराना की जनसभा में दिए गए उनके बयान ने बीजेपी को रोकने की विपक्षी रणनीति और मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।

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