Dhanteras 2026: सोना-चांदी ही नहीं, धनिया खरीदने से भी बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा! जानें क्या है यह खास मान्यता

Dhanteras 2026: धनतेरस पर सोना-चांदी के साथ धनिया खरीदना भी शुभ माना जाता है। जानें मां लक्ष्मी से जुड़ी धार्मिक मान्यता और दीपावली के प्रमुख त्योहारों की तारीखें।


October 26, 2026 • by

Dhanteras 2026: दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही घरों में साफ-सफाई, सजावट और खरीदारी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। धनतेरस के दिन सोना, चांदी और नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। हालांकि, इस पर्व से जुड़ी एक ऐसी धार्मिक मान्यता भी है, जिसके बारे में बहुत से लोग कम जानते हैं।

मान्यता के अनुसार, धनतेरस पर धनिया खरीदना भी शुभ होता है। धार्मिक विश्वास है कि धनिया माता लक्ष्मी को अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की कामना की जाती है। इस बार धनतेरस की तारीख और दीपावली के अन्य प्रमुख पर्वों को लेकर भी पंचांग के अनुसार विशेष चर्चा है।

धनतेरस पर धनिया खरीदने से जुड़ी मान्यता

धनतेरस को धन, समृद्धि और आरोग्य की कामना का प्रमुख पर्व माना जाता है। इस दिन लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदते हैं। वहीं, धनिया खरीदने की परंपरा भी धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है।

मान्यता है कि धनतेरस पर धनिया खरीदकर माता लक्ष्मी के चरणों में अर्पित करने से घर में धन-धान्य की बरकत बनी रहती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। कुछ परंपराओं में धनिया के बीजों को उन्नति और खुशहाली का प्रतीक भी माना जाता है।

धनतेरस पर खरीदारी का क्यों है विशेष महत्व?

धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। यह दीपोत्सव के प्रमुख दिनों में शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन खरीदारी करना शुभ माना जाता है और लोग अपने घरों में नई वस्तुएं लाकर समृद्धि की कामना करते हैं। सोना-चांदी खरीदने के अलावा बर्तन, पूजा सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी खरीदी जाती हैं। जिन लोगों के लिए महंगी वस्तुएं खरीदना संभव नहीं होता, वे अपनी क्षमता के अनुसार छोटी वस्तुएं खरीदकर भी पर्व मनाते हैं। धनिया खरीदने की परंपरा इसी तरह की धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है।

2026 में धनतेरस की तारीख को लेकर क्या है पंचांग का गणित?

दीपावली 2026 के पंचांग को लेकर तिथियों के समय और अलग-अलग पर्वों के निर्धारण पर चर्चा हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 5 नवंबर को रमा एकादशी और गौवत्स द्वादशी, जबकि 6 नवंबर को प्रदोष काल में धनतेरस की खरीदारी का विशेष मुहूर्त बताया गया है। वहीं, 7 नवंबर को भी धनतेरस और भगवान धन्वंतरि की जयंती का उल्लेख किया गया है। तिथि, प्रदोष काल और स्थानीय पंचांग के आधार पर पर्व मनाने के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी और पूजा की योजना बनाने से पहले अपने क्षेत्र के विश्वसनीय पंचांग से तारीख और मुहूर्त की पुष्टि करना उचित रहेगा।

भगवान धन्वंतरि की पूजा और आरोग्य की कामना

धनतेरस का संबंध केवल धन-संपत्ति से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और आरोग्य से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक परंपरा में भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु अच्छे स्वास्थ्य, परिवार की खुशहाली और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। घरों में दीप जलाने और पूजा करने की परंपरा भी निभाई जाती है। धनतेरस का संदेश यही है कि जीवन में आर्थिक समृद्धि के साथ स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली को भी महत्व दिया जाए।

नरक चतुर्दशी और दीपावली पर कब होगी पूजा?

पंचांग में 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी और शाम को महालक्ष्मी पूजन का उल्लेख किया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर दीपदान और अन्य पारंपरिक अनुष्ठान किए जाते हैं। दीपावली की शाम को माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। हालांकि, चतुर्दशी और अमावस्या की तिथियों के समय में अंतर के कारण पूजा का निर्धारण स्थानीय पंचांग के अनुसार करना चाहिए। इससे श्रद्धालु अपने क्षेत्र में प्रचलित परंपरा के अनुसार पूजा कर सकेंगे।

कार्तिक माह में क्यों मनाए जाते हैं इतने पर्व?

सनातन धर्म में कार्तिक माह को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। इस महीने में दीपावली और धनतेरस के अलावा अन्नकूट, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, छठ पूजा, गोपाष्टमी, आंवला नवमी, देव प्रबोधिनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्व भी मनाए जाते हैं। इन त्योहारों का संबंध अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं, पूजा-पद्धतियों और पारिवारिक परंपराओं से है। पूरे महीने मंदिरों, घरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष आयोजन होते हैं।

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धनतेरस 2026 से भाई दूज तक देखें त्योहारों की तारीखें

उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी के अनुसार, नवंबर 2026 में दीपावली और कार्तिक माह के प्रमुख पर्वों की तारीखें इस प्रकार बताई गई हैं। अलग-अलग पंचांगों में तिथियों और पूजा के समय में अंतर संभव है।

  • 5 नवंबर, गुरुवार: रमा एकादशी, गौवत्स द्वादशी
  • 6 नवंबर, शुक्रवार: प्रदोष व्रत, धनतेरस
  • 7 नवंबर, शनिवार: धनतेरस और धन्वंतरि जयंती
  • 8 नवंबर, रविवार: नरक चतुर्दशी और शाम को महालक्ष्मी पूजन
  • 10 नवंबर, मंगलवार: अन्नकूट, गोवर्धन पूजा
  • 11 नवंबर, बुधवार: भाई दूज
  • 14 नवंबर, शनिवार: सौभाग्य पंचमी, पांडव पंचमी
  • 15 नवंबर, रविवार: सूर्य छठ
  • 17 नवंबर, मंगलवार: गोपाष्टमी

धनतेरस पर अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार करें खरीदारी

धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना जहां समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, वहीं धनिया खरीदने की परंपरा भी धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं। धनिया खरीदकर माता लक्ष्मी को अर्पित करने की मान्यता घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना से जुड़ी है। पूजा का मुहूर्त तय करने से पहले स्थानीय पंचांग देखना भी जरूरी है, ताकि त्योहार की परंपराओं का पालन सही समय पर किया जा सके।

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