सपा के ‘75 जिले-75 घोषणापत्र’ पर मचा सियासी घमासान, ब्रजेश पाठक ने लगाए गंभीर आरोप

UP Politics: समाजवादी पार्टी के 75 जिलों के लिए अलग-अलग घोषणापत्र तैयार करने के प्लान पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने निशाना साधा। उन्होंने सपा को ‘पूरी तरह पटरी से उतरी’ पार्टी बताते हुए घोषणापत्र को लेकर गंभीर आरोप लगाए।


September 17, 2026 by

UP Politics News: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज होती जा रही हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी की ओर से प्रदेश के सभी 75 जिलों के लिए अलग-अलग स्थानीय घोषणापत्र तैयार करने की योजना चर्चा में है। सपा के इस फॉर्मूले को लेकर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की दिशा तय करने में गुंडे और माफिया प्रभावी रहे हैं।

ब्रजेश पाठक ने सपा पर साधा निशाना

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सपा के जिला स्तर पर घोषणापत्र तैयार करने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के घोषणापत्र और उसके प्लान को गुंडे-माफिया तय करते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब सपा 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर अपनी चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटी है।

सपा क्यों बना रही 75 घोषणापत्र

समाजवादी पार्टी की योजना पूरे उत्तर प्रदेश के लिए सिर्फ एक घोषणापत्र जारी करने के बजाय हर जिले की स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर अलग दस्तावेज तैयार करने की है। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड जैसे अलग-अलग क्षेत्रों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां तथा स्थानीय समस्याएं एक जैसी नहीं हैं। इसलिए जिला स्तर पर अलग प्राथमिकताएं तय करने की योजना बनाई गई है।

स्थानीय समस्याओं पर रहेगा फोकस

सपा के प्रस्तावित ‘एक जिला, एक घोषणापत्र’ फॉर्मूले में स्थानीय समस्याओं और लोगों की जरूरतों को प्रमुखता देने की बात कही गई है। पार्टी स्तर पर जिला इकाइयों से स्थानीय मुद्दों, अधूरे प्रोजेक्ट, रोजगार की संभावनाओं और जनता की अपेक्षाओं से जुड़ी जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की रिपोर्ट है।

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शिक्षा से रोजगार तक मुद्दे

रिपोर्टों के अनुसार, जिला स्तरीय घोषणापत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य, रोजगार एवं उद्योग, किसान और कारीगर, बुनियादी ढांचा तथा पर्यटन जैसे विषयों को शामिल करने की तैयारी है। इसके अलावा युवाओं से जुड़े मुद्दों और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को भी घोषणापत्र का हिस्सा बनाने की योजना बताई गई है।

‘एक जिला, एक उत्पाद’ से जुड़ा फॉर्मूला

सपा की यह रणनीति उत्तर प्रदेश सरकार के ‘एक जिला, एक उत्पाद’ अभियान से मिलते-जुलते स्थानीय फोकस के तौर पर देखी जा रही है। पार्टी का तर्क है कि अलग-अलग जिलों की आर्थिक गतिविधियां और विकास संबंधी जरूरतें अलग हैं, इसलिए चुनावी वादों में भी स्थानीय मुद्दों को जगह मिलनी चाहिए।

अखिलेश यादव ने पहले दी थी जानकारी

अखिलेश यादव ने पहले दी थी जानकारी

अखिलेश यादव की ओर से स्थानीय जिला स्तरीय घोषणापत्र तैयार करने की योजना की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए दी गई थी। इसके बाद पार्टी ने जिलों से स्थानीय समस्याओं और अपेक्षाओं से जुड़ी जानकारी जुटाने पर काम शुरू किया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी का लक्ष्य ऐसे दस्तावेज तैयार करना है जिनमें प्रत्येक जिले की प्राथमिकताओं को अलग तरीके से रखा जा सके।

चुनावी रणनीति में बदलाव

सपा का यह कदम 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उसकी चुनावी रणनीति में स्थानीय मुद्दों को ज्यादा महत्व देने की कोशिश के तौर पर सामने आया है। पार्टी के मुताबिक, राज्य स्तर के मुद्दों के साथ-साथ सड़क, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, किसान और स्थानीय विकास जैसे विषयों को जिले के हिसाब से सामने रखा जा सकता है।

पीएम मोदी के जन्मदिन पर सेवा अभियान

पीएम मोदी के जन्मदिन पर सेवा अभियान

इसी बीच डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर लखनऊ के सिविल अस्पताल में सेवा संकल्प अभियान के तहत कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान मरीजों को फल वितरित किए गए और रक्तदान शिविर की शुरुआत की गई।

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17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक कार्यक्रम

बीजेपी की ओर से चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है। अभियान के दौरान अस्पतालों में फल वितरण के साथ रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान और अन्य सेवा गतिविधियां आयोजित करने की योजना है।

यूपी की सियासत में बयानबाजी तेज

एक तरफ समाजवादी पार्टी 2027 के चुनाव के लिए जिलावार घोषणापत्र की रणनीति पर आगे बढ़ रही है, वहीं बीजेपी की ओर से इस पहल पर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आ रही है। ब्रजेश पाठक का बयान इसी सियासी टकराव की कड़ी के रूप में सामने आया है। आने वाले समय में दोनों दलों की ओर से स्थानीय मुद्दों और चुनावी घोषणाओं को लेकर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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