यूपी में कांग्रेस-सपा सीट बंटवारे पर बढ़ा घमासान, 180 सीटों की लिस्ट से क्यों नाराज हैं अखिलेश यादव?

Congress SP Seat Sharing: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर घमासान तेज हो गया है। 180 सीटों की सूची, 200 सीटों पर दावे और जिताऊ उम्मीदवारों को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति बनाने की चुनौती बढ़ गई है।


October 24, 2026 • by

Congress SP Seat Sharing: न्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज होने की खबरें सामने आ रही हैं। दोनों दलों का मकसद भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देना है, लेकिन चुनाव में कितनी सीटों पर कौन-सी पार्टी उम्मीदवार उतारेगी, इसे लेकर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है।

कांग्रेस की ओर से 180 सीटों की सूची साझा किए जाने और पार्टी नेताओं के 200 सीटों पर चुनाव लड़ने के दावे ने गठबंधन की बातचीत को और दिलचस्प बना दिया है। वहीं, समाजवादी पार्टी कांग्रेस से उन सीटों और उम्मीदवारों का ब्योरा चाहती है, जहां पार्टी जीतने की स्थिति में है।

सीटों के आंकड़ों ने बढ़ाई गठबंधन की मुश्किल

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों का बंटवारा केवल संख्या तक सीमित नहीं है। दोनों दलों के सामने अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव, संगठन की ताकत और चुनाव जीतने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने की चुनौती है।

कांग्रेस जहां अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की अपनी दावेदारी पेश करती दिख रही है, वहीं समाजवादी पार्टी के सामने गठबंधन की कुल चुनावी संभावनाओं को मजबूत बनाए रखने का सवाल है। ऐसे में सीटों की संख्या और उम्मीदवारों की जीतने की क्षमता पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनना बेहद अहम माना जा रहा है।

180 सीटों की सूची पर क्यों उठे सवाल?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के सामने 180 विधानसभा सीटों की सूची रखी है, जिन पर वह चुनाव लड़ना चाहती है। इस सूची को लेकर सपा के कुछ नेताओं की नाराजगी की चर्चा है।

समाजवादी पार्टी की ओर से यह अपेक्षा की जा रही है कि कांग्रेस केवल सीटों की मांग न करे, बल्कि उन उम्मीदवारों के नाम भी सामने रखे जो चुनाव में मजबूत चुनौती पेश कर सकते हैं। सपा की चिंता यह है कि अगर गठबंधन में सीटों का बंटवारा वास्तविक चुनावी संभावनाओं को ध्यान में रखकर नहीं किया गया, तो इसका नुकसान दोनों दलों को उठाना पड़ सकता है।

अखिलेश यादव की रणनीति पर टिकी निगाहें

सीट बंटवारे को लेकर सामने आ रही मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि अखिलेश यादव कांग्रेस को 100 से कम सीटें देने के पक्ष में हो सकते हैं। समाजवादी पार्टी की ओर से सीटों की अंतिम संख्या को लेकर कोई स्पष्ट सार्वजनिक फैसला सामने आए बिना इस पर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। फिर भी, कांग्रेस की मांग और सपा की रणनीति के बीच अंतर को देखते हुए दोनों दलों के लिए बातचीत का रास्ता आसान नहीं दिखाई देता। अब राजनीतिक नजरें इस बात पर हैं कि अखिलेश यादव कांग्रेस की दावेदारी पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।

200 सीटों पर चुनाव लड़ने के बयान से बढ़ी चर्चा

कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश में अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, AICC के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि कांग्रेस को राज्य में कम से कम 200 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए। उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। ऐसे में 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

यदि कांग्रेस इतने बड़े हिस्से पर अपना दावा बनाए रखती है, तो समाजवादी पार्टी को भी अपने उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति के हिसाब से सीटों का संतुलन तय करना होगा।

प्रियंका गांधी के सामने भी उठा सीटों का मुद्दा

मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया है कि 19 अक्टूबर को राहुल गांधी के आवास पर आयोजित चाय पार्टी के दौरान सीट बंटवारे का मुद्दा उठा था। बताया गया कि समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने प्रियंका गांधी के सामने कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ने के लिए प्रस्तावित सीटों की सूची सौंपने का विषय रखा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रियंका गांधी ने इस पर सूची देने का आश्वासन दिया था। इस घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि गठबंधन के भीतर सीटों की मांग के साथ-साथ यह जानने की कोशिश भी की जा रही है कि कांग्रेस किन क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत मानती है।

प्रियंका गांधी ने सीटों की संख्या से ज्यादा जीत की संभावना पर दिया जोर

सूत्रों के मुताबिक, प्रियंका गांधी ने 180 सीटों की सूची को अंतिम फैसला मानने के बजाय बातचीत की शुरुआत बताया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका जोर इस बात पर था कि गठबंधन में केवल सीटों की संख्या पर बहस करने के बजाय उन सीटों पर ध्यान दिया जाना चाहिए जहां जीत की संभावना अधिक हो। इसी संदर्भ में 80 से 90 सीटों पर भी समझौते की संभावना का जिक्र किए जाने की बात सामने आई है।

कांग्रेस ने सीटों को चार श्रेणियों में बांटा

खबरों के अनुसार, पार्टी ने विधानसभा सीटों को A, B, C और D की चार श्रेणियों में बांटा है। बताया जा रहा है कि यह वर्गीकरण आंतरिक सर्वे और चुनावी संभावनाओं के आधार पर किया गया है। इसका उद्देश्य उन सीटों की पहचान करना है जहां कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है और जहां उसे अधिक मेहनत की जरूरत पड़ सकती है। यदि यह आकलन सीट बंटवारे की बातचीत में इस्तेमाल होता है, तो कांग्रेस अपनी दावेदारी के समर्थन में चुनावी आंकड़े और उम्मीदवारों की स्थिति सामने रख सकती है।

जिताऊ उम्मीदवारों की सूची पर दोनों दलों में मतभेद

समाजवादी पार्टी की चिंता कांग्रेस के उम्मीदवारों की जीतने की क्षमता को लेकर है। गठबंधन में शामिल दलों के लिए यह जरूरी होता है कि वे ऐसी सीटों पर एक-दूसरे के सामने उम्मीदवार न उतारें, जहां इससे वोटों का बंटवारा हो सकता है। सपा का पक्ष बताया जा रहा है कि कांग्रेस को उन सीटों पर प्राथमिकता देनी चाहिए जहां उसके उम्मीदवारों की स्थिति मजबूत है।

दूसरी ओर, कांग्रेस की दलील यह बताई जा रही है कि उम्मीदवारों के नाम और चुनाव लड़ने की रणनीति साझा करने के अपने राजनीतिक पहलू हैं। इसी वजह से सीटों की सूची और संभावित उम्मीदवारों के विवरण पर सहमति बनना बातचीत का अहम हिस्सा बन गया है।

उम्मीदवारों के नाम साझा करने पर कांग्रेस की आपत्ति

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर यह विचार भी सामने आया है कि पार्टी को अपने उम्मीदवारों के नाम किसी दूसरी पार्टी के साथ साझा करने की बाध्यता क्यों होनी चाहिए। इस रुख के पीछे उम्मीदवार चयन की गोपनीयता और पार्टी की स्वतंत्र चुनावी रणनीति जैसे मुद्दे हो सकते हैं।

कांग्रेस का तर्क बताया जा रहा है कि गठबंधन में सीटों को लेकर बातचीत की जा सकती है, लेकिन हर सीट पर उम्मीदवार कौन होगा, इसका फैसला पार्टी अपने स्तर पर भी कर सकती है। वहीं, समाजवादी पार्टी के लिए उम्मीदवारों की संभावित ताकत का आकलन करना सीटों की मांग पर फैसला लेने में मददगार हो सकता है। यही अंतर दोनों पक्षों के बीच तनाव की एक प्रमुख वजह माना जा रहा है।

2022 के विधानसभा चुनाव का प्रदर्शन क्यों है अहम?

उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। कांग्रेस का प्रदर्शन उस चुनाव में बेहद कमजोर रहा था और पार्टी केवल दो सीटें जीत सकी थी। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने 111 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस पिछले चुनावी प्रदर्शन का हवाला देते हुए सपा के भीतर कांग्रेस की मौजूदा दावेदारी को लेकर सवाल उठने की चर्चा है।

महिला उम्मीदवारों पर कांग्रेस के पुराने फैसले की चर्चा

2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की रणनीति भी अपनाई थी। पार्टी ने अपने उम्मीदवारों में करीब 40 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देने की घोषणा की थी, लेकिन यह रणनीति चुनावी सीटों में बड़े बदलाव में तब्दील नहीं हो सकी।

अब सीट बंटवारे की बातचीत में कांग्रेस के सामने एक तरफ अपने संगठन को मजबूत दिखाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ गठबंधन के भीतर अधिक सीटें हासिल करने की जरूरत भी है। समाजवादी पार्टी के साथ बातचीत में कांग्रेस को यह स्पष्ट करना पड़ सकता है कि किन क्षेत्रों में उसका संगठन और उम्मीदवार जीत की मजबूत संभावना रखते हैं।

बीजेपी को चुनौती देने के लिए गठबंधन कितना जरूरी?

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे का विवाद इसलिए भी अहम है क्योंकि दोनों दलों के सामने बीजेपी को चुनौती देने का लक्ष्य है। यदि गठबंधन में सहमति नहीं बनती या सीटों को लेकर लंबे समय तक खींचतान जारी रहती है, तो इसका असर चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।

वहीं, यदि दोनों दल सीटों का बंटवारा आपसी सहमति और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के आधार पर करते हैं, तो वे अपने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।

अब बातचीत के अगले दौर पर टिकी नजरें

फिलहाल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर अंतिम सहमति के संबंध में तस्वीर स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस की ओर से 180 सीटों की सूची, 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी और सपा की जिताऊ उम्मीदवारों की सूची मांगने की रणनीति ने इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।

प्रियंका गांधी की ओर से सीटों की गुणवत्ता पर जोर दिए जाने की खबरों से यह संकेत मिलता है कि बातचीत में जीत की संभावनाओं को अहम आधार बनाया जा सकता है। अब देखना होगा कि दोनों दल कितनी सीटों पर सहमत होते हैं और क्या उम्मीदवारों को लेकर उठे सवालों का समाधान निकल पाता है। अंतिम फैसला सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी किस तरह चुनावी रणनीति के साथ आगे बढ़ती हैं।

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