दिग्विजय भाटी मामले में सियासी घमासान: थर्ड डिग्री के आरोपों पर अखिलेश-चंद्रशेखर ने सरकार को घेरा

Digvijay Bhati Third Degree: मेरठ में दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव से कथित थर्ड डिग्री के मामले पर अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आजाद ने सरकार को घेरा। दोनों नेताओं ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।


August 22, 2026 by

Digvijay Bhati Third Degree Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ में किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के साथ कथित पुलिस बर्बरता का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दोनों ने तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय पर मारपीट और कथित यातनाएं देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपों के मुताबिक, एसएसपी कार्यालय में दोनों के साथ अभद्रता और मारपीट की गई, जिसके बाद उन्हें एसओजी के हवाले किया गया। वहां भी कथित तौर पर थर्ड डिग्री दिए जाने की बात सामने आई है।

एसएसपी कार्यालय में क्या हुआ?

पीड़ितों की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय ने दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव को अपने कार्यालय बुलाया था। आरोप है कि वहां दोनों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। इसके बाद कथित तौर पर उन्हें एसओजी के सुपुर्द कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब पुलिस कार्रवाई और अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

एसओजी पर भी गंभीर आरोप

मामले में आरोप केवल एसएसपी कार्यालय तक सीमित नहीं हैं। दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि एसओजी की हिरासत में उन्हें बेहद अमानवीय तरीके से प्रताड़ित किया गया। आरोपों में पैर बांधकर उल्टा लटकाने और फट्टों व लाठियों से पीटने जैसी बातें कही गई हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक स्तर पर पुष्टि होना अभी महत्वपूर्ण है।

अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना

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मामला सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर हमला बोला। उन्होंने किसान नेताओं के साथ कथित थर्ड डिग्री की घटना को लेकर भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और इसे गंभीर मामला बताया।

“किसानों की आवाज दबाने” का लगाया आरोप

अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि किसान नेताओं को थाने में कथित तौर पर थर्ड डिग्री देकर प्रताड़ित किया जाना सरकार की घबराहट को दर्शाता है। उन्होंने किसान आंदोलन और किसानों से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए भाजपा सरकार पर राजनीतिक स्वार्थ के लिए किसानों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

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दोषियों पर कार्रवाई की मांग

अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले की गहराई से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की मांग करते हुए घटना को बेहद निंदनीय बताया। अपने पोस्ट के साथ उन्होंने दिग्विजय भाटी की घायल अवस्था की तस्वीर भी साझा की।

चंद्रशेखर आजाद ने भी उठाए सवाल

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आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने भी मेरठ की घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मोहित जाटव और दिग्विजय भाटी के साथ पुलिस हिरासत में कथित बर्बरता कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

यह पुलिसिंग नहीं, ताकत का दुरुपयोग

चंद्रशेखर आजाद ने अपने बयान में कहा कि यदि पीड़ितों के आरोप सही हैं तो यह पुलिसिंग नहीं बल्कि वर्दी की ताकत का खुला दुरुपयोग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पुलिस अधिकारी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। उनके मुताबिक, वर्दी कानून से ऊपर नहीं हो सकती और हिरासत में किसी भी व्यक्ति के साथ अमानवीय व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

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सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराने की मांग

चंद्रशेखर आजाद ने सरकार से मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज को तत्काल सुरक्षित कराने की मांग की। उनका कहना है कि घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए उपलब्ध डिजिटल और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि पुलिस कार्यालय और संबंधित स्थानों पर वास्तव में क्या हुआ था।

स्वतंत्र मेडिकल जांच पर जोर

चंद्रशेखर आजाद ने पीड़ितों के स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण की भी मांग की। उनका कहना है कि कथित मारपीट और यातना के आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष चिकित्सकीय जांच जरूरी है। मेडिकल रिपोर्ट जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आ सकती है और आरोपों की पुष्टि या खंडन में मदद कर सकती है।

पुलिस की जवाबदेही पर बहस तेज

इस मामले ने उत्तर प्रदेश में पुलिस की जवाबदेही और हिरासत में मानवाधिकारों को लेकर बहस फिर तेज कर दी है। राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों की जांच किस स्तर पर कराता है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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निष्पक्ष जांच की मांग

दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव से जुड़े आरोपों ने पुलिस व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ पीड़ित पक्ष की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ इन आरोपों की निष्पक्ष जांच के जरिए तथ्य सामने आना जरूरी है। मामले में सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच से घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

सरकार के सामने बड़ी चुनौती

अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आजाद के खुलकर सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी अहम हो गया है। दोनों नेताओं ने अलग-अलग तरीके से सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब प्रशासन की कार्रवाई और जांच की दिशा पर सभी की नजर बनी हुई है।

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