फांसी की सजा के खिलाफ मुस्कान-साहिल की कानूनी लड़ाई शुरू, हाईकोर्ट पहुंचे दोनों!

Meerut News: नीले ड्रम हत्याकांड में फांसी की सजा पाने वाले मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर मेरठ की जिला अदालत के फैसले को चुनौती दी है।


October 24, 2026 • by

Blue Drum Murder Case: नीले ड्रम हत्याकांड में फांसी की सजा पाने वाले मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने मेरठ की जिला अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। दोनों ने अपील दाखिल कर निचली अदालत के फैसले को रद्द करने की मांग की है। 14 अक्टूबर 2026 को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद इस मामले में अब कानूनी लड़ाई का अगला चरण शुरू हो गया है। हाईकोर्ट में अपील पर सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि निचली अदालत के फैसले में कोई बदलाव होता है या नहीं।

सजा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे दोनों दोषी

मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या और सबूत छिपाने के मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई। अब दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर इस फैसले को चुनौती दी है। उनकी अपील में दोषी ठहराए जाने के फैसले के साथ-साथ मौत की सजा पर भी सवाल उठाए गए हैं। अब हाईकोर्ट में इस मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सुनवाई होगी।

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क्या है पूरा नीले ड्रम हत्याकांड?

यह मामला मर्चेंट नेवी में काम करने वाले सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है। मार्च 2025 में सौरभ की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को आरोपी बनाया गया था। जांच और सुनवाई के बाद मामला मेरठ की जिला अदालत पहुंचा, जहां अभियोजन पक्ष ने दोनों के खिलाफ सबूत और गवाह पेश किए। मामले की गंभीरता और सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई थी।

13 महीने तक चली सुनवाई, 126 बार हुई कार्यवाही

इस चर्चित हत्याकांड की सुनवाई करीब 13 महीने तक चली। इस दौरान अदालत में कुल 126 सुनवाई हुईं। अभियोजन पक्ष ने अपने मामले के समर्थन में 22 गवाह पेश किए। इन गवाहों में चाकू, नीले ड्रम और अन्य सामान की खरीद से जुड़े लोग भी शामिल थे। इसके अलावा होटल मैनेजरों और कैब ड्राइवरों के बयान भी दर्ज किए गए। सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद जिला अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया था।

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30 सितंबर को दोषी करार

मेरठ की जिला अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल को हत्या करने तथा सबूत छिपाने के मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को दोनों को मौत की सजा सुनाई गई। फैसले के बाद अब दोनों ने उच्च न्यायालय का रुख किया है। अपील में दोषसिद्धि और सजा, दोनों को चुनौती दिए जाने से मामले की कानूनी प्रक्रिया एक नए चरण में पहुंच गई है। अब हाईकोर्ट में पेश होने वाली दलीलों और संबंधित कानूनी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्यवाही होगी।

अब हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजरें

मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की अपील पर अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में आगे की सुनवाई होनी है। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और निचली अदालत के फैसले से जुड़े कानूनी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। हाईकोर्ट का फैसला आने तक जिला अदालत के निर्णय को चुनौती देने वाली अपील विचाराधीन रहेगी। फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट की ओर से अंतिम फैसला आना बाकी है।

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