Bijnor News Today: बिजनौर के मंडावली क्षेत्र में रविवार सुबह बाघ के हमले से हड़कंप मच गया। वन क्षेत्र में पशु चराने जा रहे करीब 33 वर्षीय पशुपालक स्वामी रफी पर घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक हमला कर दिया। इसी दौरान बेटे को बाघ के पंजों में फंसा देख उसके पिता ने बिना अपनी जान की परवाह किए डंडा उठाया और बाघ पर लगातार वार करने शुरू कर दिए। पिता के इस साहस के सामने आखिरकार बाघ पीछे हट गया और गुर्राता हुआ जंगल की ओर भाग निकला।
घात लगाकर बैठा था बाघ
जानकारी के मुताबिक, मंडावली के गांव गुढ़ा पंचायत के सहानपुर नानू उर्फ गुलाल वाली क्षेत्र के नीम वाली वन क्षेत्र के आसपास गुज्जर परिवार रहते हैं। रविवार सुबह करीब आठ बजे स्वामी रफी पुत्र गुलाम नबी अपने पशुओं को चराने के लिए वन क्षेत्र की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान झाड़ियों और वन क्षेत्र में छिपकर बैठे बाघ ने अचानक उन पर हमला बोल दिया। अचानक हुए हमले से रफी संभल नहीं सके और बाघ के पंजों की चपेट में आकर घायल हो गए।
बेटे को बचाने के लिए पिता ने उठाया डंडा

रफी पर बाघ का हमला होते ही उनके साथ चल रहे पिता गुलाम नबी ने स्थिति को भांप लिया। बेटे को बचाने के लिए उन्होंने बिना देर किए बाघ पर डंडे से हमला शुरू कर दिया। पिता ने बाघ पर कई वार किए, जिसके बाद बाघ पीछे हटने लगा। लगातार डंडे पड़ने से बाघ गुर्राता हुआ वन क्षेत्र की ओर भाग गया। इस तरह पिता की बहादुरी ने बेटे की जान बचा ली।
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हाथ और कंधे पर पंजों के निशान

बाघ के हमले में स्वामी रफी के हाथ और कंधे पर चोट आई है। शरीर पर बाघ के पंजों के निशान भी पाए गए हैं। घटना के बाद घायल पशुपालक को ग्राम प्रधान पति नरवेल सिंह की मदद से नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार कराया गया। फिलहाल रफी की हालत के बारे में गंभीर स्थिति की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
आज पिता न होते तो जान चली जाती
घटना के बाद घायल रफी ने अपने पिता की बहादुरी को याद करते हुए कहा कि अगर उस समय उनके पिता साथ नहीं होते तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। उन्होंने माना कि बाघ के हमले के दौरान पिता ने अपनी जान की परवाह किए बिना उसे बचाने के लिए मुकाबला किया। कुछ ही पलों में पिता के डंडे बरसाने से बाघ वहां से भाग गया।
पहले भी पशुओं को बना चुका है निशाना
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह बाघ पिछले काफी समय से डेरों के आसपास घूमता देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ पहले भी कई पशुओं को अपना शिकार बना चुका है। वन क्षेत्र के नजदीक लगातार बाघ की मौजूदगी से पशुपालकों में डर का माहौल बना हुआ है और लोग अकेले जंगल की तरफ जाने से भी आशंकित हैं।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता
ग्रामीणों की चिंता सिर्फ पशुओं और पशुपालकों तक सीमित नहीं है। मुस्तफा, शमशेर, यामीन और गुलाम नबी समेत ग्रामीणों ने बताया कि उनके बच्चे भी करीब चार किलोमीटर वन क्षेत्र से होकर सहानपुर नानू स्थित प्राथमिक विद्यालय पहुंचते हैं। ऐसे में बाघ की लगातार मौजूदगी बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर रही है।
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वन विभाग से सुरक्षा की मांग
घटना की सूचना सहानपुर वन रेंज के वन क्षेत्राधिकारी को दे दी गई है। ग्रामीणों ने वन विभाग के उच्च अधिकारियों से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और बाघ की निगरानी बढ़ाने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि वन विभाग बाघ की गतिविधियों पर नजर रखे, ताकि भविष्य में किसी व्यक्ति या बच्चे पर दोबारा हमला न हो।
वन क्षेत्र के आसपास बढ़ा डर
बाघ के इस हमले के बाद मंडावली क्षेत्र के वन किनारे बसे परिवारों में दहशत का माहौल है। पशुपालकों के सामने अपने मवेशियों को चराने की मजबूरी है, वहीं जंगल में बाघ की मौजूदगी उनके लिए बड़ा खतरा बनी हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग जल्द प्रभावी कदम उठाए, जिससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाओं को रोका जा सके।

Tannu Chauhan एक अनुभवी डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार लेखन का लगभग 3 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने Royal Bulletin और Moradabad Live News में डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में वह UP News 24 के लिए विभिन्न विषयों पर तथ्यात्मक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित समाचार एवं डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं।
